ईरान , 24 अगस्त 2026 । ईरान की संसद ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंता पैदा हो गई है।
ईरान की संसद ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल यानी फीस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जिन देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति होगी, उनसे समुद्री सेवाओं के बदले शुल्क लिया जाएगा।
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता हसन काशकवी के मुताबिक, फीस के बदले समुद्री सेवाएं, सुरक्षा और इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।
इसके अलावा पर्यावरण संबंधी सेवाएं और खास परिस्थितियों में ईंधन भी दिया जाएगा भुगतान ईरानी रियाल या ईरान की पसंद की किसी दूसरी करेंसी में किया जा सकेगा।
अमेरिकी वित्त मंत्री बोले- ईरान के खिलाफ आर्थिक जंग शुरू
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन अब ईरान के खिलाफ आर्थिक जंग के आखिरी दौर में पहुंच गया है। बेसेंट के मुताबिक अमेरिका का मकसद ईरान की कमाई के बड़े रास्ते बंद करना है।
बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अपनी सभी सरकारी एजेंसियों और अधिकारों का इस्तेमाल करेगा। इससे पहले ट्रम्प ने इसे किसी विरोधी देश के खिलाफ सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई बताया था और दूसरे देशों से ईरान को अलग-थलग करने में साथ देने की अपील की थी।
ईरान के इस फैसले से इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों और अन्य वाणिज्यिक जहाजों की परिचालन लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर तेल की कीमतों और वैश्विक शिपिंग कारोबार पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
संसद की मंजूरी के बाद अब टोल वसूली की प्रक्रिया, दर और नियमों को लेकर आगे की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। यह भी देखा जाएगा कि ईरान इस व्यवस्था को किस तरह लागू करता है और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियां इस पर कैसी प्रतिक्रिया देती हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव के कारण संवेदनशील समुद्री क्षेत्र बना हुआ है। ऐसे में टोल वसूली के फैसले ने इस मार्ग की सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
भारत समेत एशिया के कई देशों के लिए भी होर्मुज महत्वपूर्ण है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से जुड़ा है। इसलिए ईरान के इस फैसले का असर वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर नजर रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।