चंडीगढ़ , 22 अगस्त 2026 । पंजाब की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के पुराने गठबंधन की वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा है कि पंजाब के लोग दोनों दलों को फिर से एक साथ देखना चाहते हैं। उनका बयान हरसिमरत कौर बादल के हालिया संकेतों के बाद आया है, जिससे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संभावित गठबंधन की अटकलों को और बल मिला है।
हरसिमरत कौर ने कही थी ये बात
हरसिमरत ने बृहस्पतिवार को लोंगोवाल में कहा था कि गुरु साहिब आशीर्वाद दें। यह बोलना मेरा काम नहीं है, इसलिए मैं अपनी जुबान रोक रही हूं। आपको खुद पता चल जाएगा। उन्होंने कहा था कि भगवान कृपा करें और लोग हमें ताकत दें। ऐसे समझौते, जिनके माध्यम से दिल्ली से विकास और प्रगति के काम होते थे और एक बार फिर पंजाब में विकास एवं तरक्की की नींव रखी जाए, जिससे पंजाब और पंजाब के लोगों को लाभ मिले। मजीठिया ने पुराने गठबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के बीच हुआ गठबंधन सांप्रदायिक सौहार्द और हिंदू-सिख एकता पर आधारित था।
हरसिमरत कौर के बयान के बाद बढ़ी हलचल
हरसिमरत कौर बादल ने हाल ही में कहा था कि पंजाब के विकास और प्रगति में मदद करने वाले गठबंधन दोबारा होने चाहिए। उनके इस बयान को BJP और अकाली दल के बीच संभावित नजदीकी के संकेत के तौर पर देखा गया। इसके बाद मजीठिया ने भी दोनों दलों के साथ आने की पैरवी की है। हालांकि, अभी दोनों पार्टियों की ओर से किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है।
मजीठिया ने पुराने गठबंधन का किया जिक्र
मजीठिया ने अकाली दल और BJP के पुराने रिश्ते का उल्लेख करते हुए कहा कि यह गठबंधन भाईचारे, सांप्रदायिक सौहार्द और हिंदू-सिख एकता की भावना पर आधारित था। उन्होंने पंजाब की मौजूदा परिस्थितियों में दोनों दलों के साथ आने को जरूरी बताया और कहा कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है।
2027 चुनाव से पहले नए सियासी समीकरण
पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। ऐसे में BJP-अकाली दल के संभावित गठबंधन से राज्य के राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। दोनों दल लंबे समय तक सहयोगी रहे थे, लेकिन कृषि कानूनों के मुद्दे पर सितंबर 2020 में अकाली दल ने BJP के नेतृत्व वाले NDA से नाता तोड़ लिया था। फिलहाल मजीठिया और हरसिमरत कौर के बयानों ने गठबंधन की चर्चा जरूर तेज कर दी है, लेकिन सीट बंटवारे और औपचारिक गठबंधन जैसे अहम मुद्दों पर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व का फैसला बाकी है।