नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026 । दिल्ली में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 20 अगस्त तक राजधानी में इस साल स्वाइन फ्लू के कुल 1,777 मामले सामने आ चुके हैं। अकेले 20 अगस्त को 114 नए H1N1 संक्रमित मिले। इसी दिन दिल्ली में इन्फ्लूएंजा के कुल 159 नए मामले दर्ज किए गए।
जिस तेजी से एसी का इस्तेमाल बढ़ा है, उससे संक्रमण को फैलने में भी मदद मिल रही है। पहले यह संक्रमण सर्दी में ज्यादा फैलता था।
अब इसलिए, कोविड की तरह यह भी वायरल इन्फेक्शन है और इसमें भी हैंड हाइजीन और मास्क बचाव के बेहतर उपाय हैं। एम्स के इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ. नीरज निश्चल ने बताया कि मॉनसून के दौरान मौसम में लगातार बदलाव, घरों और बंद जगहों पर लोगों की अधिक भीड़, एसी का ज्यादा इस्तेमाल और हवा का ठीक से बाहर न निकलना इन्फ्लुएन्जा के संक्रमण को बढ़ावा दे सकता है।
मामलों में अचानक बढ़ोतरी के बाद स्वास्थ्य विभाग और केंद्र सरकार भी सतर्क हो गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दिल्ली में H1N1 और मौसमी इन्फ्लूएंजा की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में संक्रमण की निगरानी, टेस्टिंग, अस्पतालों की तैयारियों और मरीजों के इलाज से जुड़े इंतजामों पर चर्चा हुई।
बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा खतरा
डॉक्टरों के मुताबिक H1N1 में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, थकान और ठंड लगने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में संक्रमण गंभीर होने पर सांस लेने में परेशानी और ऑक्सीजन का स्तर कम होने जैसी समस्या भी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में गंभीर संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है।
दिल्ली में इससे पहले बच्चों में गंभीर H1N1 संक्रमण और मौत के मामले भी सामने आ चुके हैं, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ी है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने के बजाय लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
लगातार बढ़ते मामलों के बीच अस्पतालों में निगरानी और तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से संक्रमण से बचाव के लिए मास्क, हाथों की स्वच्छता और बेहतर वेंटिलेशन जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है।
दिल्ली में स्वाइन फ्लू के बढ़ते आंकड़ों ने मानसून और बदलते मौसम के बीच स्वास्थ्य संबंधी चिंता बढ़ा दी है। अब प्रशासन की निगरानी इस बात पर है कि संक्रमण की रफ्तार को कैसे नियंत्रित किया जाए और गंभीर मरीजों के लिए अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध रहें।