नई दिल्ली, 21 अगस्त 2026 । कैंसर मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जीवनरक्षक दवाओं के कथित अवैध कारोबार का क्राइम ब्रांच ने खुलासा किया है। मामले में क्राइम ब्रांच ने 17 लोगों को पकड़ा है। इस कार्रवाई के बाद कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाओं की अवैध खरीद-फरोख्त को लेकर चिंता बढ़ गई है। डीसीपी (क्राइम) आदित्य गौतम के मुताबिक, जांच में गैंग का नेटवर्क दिल्ली-NCR, मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, हरियाण, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक फैला मिला। दवाओं की खरीद, स्टोरेज और सप्लाई में कई लेवल पर बिचौलियों की भूमिका सामने आई है।
11 जुलाई को कई ठिकानों पर मारी गई रेड
एसीपी रमेश लांबा की देखरेख में इंस्पेक्टर कमल कुमार की टीम ने इंस्ट दिल्ली, रोहिणी और मुंबई के कई संदिग्ध ठिकानों की पहचान की। इसके बाद 11 जुलाई को इन जगहों पर रेड की गई। कई एंटी-कैंसर दवाएं बरामद होने के बाद 12 जुलाई को केस दर्ज किया गया।
जांच के मुताबिक, गैंग 3 प्रमुख तरीकों से काम करता था। सबसे पहले नकली एंटी-कैंसर दवाएं खरीदी जाती थीं। फिर अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं को कर्मचारियों की मदद से निकलवाकर बाजार में पहुंचती थी। फिर सरकारी संस्थानों और गोदामों से दवाओं को अवैध तरीके से बिचौलियों के जरिए बाजार में सप्लाई किया जाता था।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित नेटवर्क का संचालन किस तरह किया जा रहा था और इसमें दवाओं की सप्लाई से लेकर बिक्री तक कौन-कौन लोग शामिल थे। यह भी जांच का विषय है कि दवाएं वैध चैनल से बाहर कैसे पहुंचीं और इन्हें मरीजों या अन्य खरीदारों तक किस तरीके से पहुंचाया जा रहा था।
कैंसर की दवाएं कई मरीजों के लिए बेहद जरूरी होती हैं और इनकी कीमत भी काफी अधिक हो सकती है। ऐसे में यदि जीवनरक्षक दवाओं की अवैध बिक्री या जमाखोरी होती है, तो इसका सीधा असर मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ सकता है। दवाओं की गुणवत्ता, भंडारण और असली-नकली होने से जुड़े पहलुओं की जांच भी इस तरह के मामलों में महत्वपूर्ण होती है।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के बाद बरामद दवाओं, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा सकती है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसका नेटवर्क किन-किन स्थानों तक फैला हुआ था।
17 लोगों के पकड़े जाने के बाद मामले में आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी। पुलिस आरोपियों से पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और इसके पीछे मौजूद मुख्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश करेगी। हालांकि, आरोपियों की भूमिका और दोष अदालत में साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज से जुड़ी दवाओं के कथित अवैध कारोबार का मामला स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद गंभीर है। अब जांच का फोकस नेटवर्क के संचालन, दवाओं के स्रोत और संभावित खरीदारों तक उनकी पहुंच के साथ-साथ इस कारोबार से जुड़े पूरे आर्थिक लेनदेन का पता लगाने पर रहेगा।