गुरुग्राम, 21 अगस्त 2026 । गुरुग्राम के टीकली इलाके में 17 वर्षीय छात्र की जहरीला पदार्थ खाने से मौत के मामले में चार महीने बाद पुलिस ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म और गुजरात स्थित विक्रेता के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, छात्र ने अप्रैल में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सल्फास मंगाया था। बाद में उसकी मौत हो गई। मामले में छात्र की मां की शिकायत और अदालत में दायर याचिका के बाद जांच आगे बढ़ी।
मां ने मोबाइल में देखा तो पता चला
पुलिस के अनुसार, छात्र ने हाल ही में 12वीं कक्षा की परीक्षा दी थी। 28 अप्रैल को जहर के कारण उसकी मौत हो गई थी। उस समय पुलिस ने पिता के बयानों के आधार पर कार्रवाई की थी। बेटे की मौत के बाद पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपना मोबाइल अपने बेटे को दिया हुआ था। मोबाइल चेक किया तो चौंकाने वाला सच सामने आया। 11 अप्रैल को छात्र के मोबाइल से एक कंपनी ऐप के जरिए सल्फास का ऑर्डर दिया गया था।
मामला सामने आने के बाद छात्र की मां ने उसके मोबाइल फोन की जांच की। इसमें पता चला कि 11 अप्रैल को उसके मोबाइल से ऑनलाइन ऐप के जरिए सल्फास का ऑर्डर किया गया था। शिकायत के अनुसार, यह पार्सल गुजरात के सूरत स्थित एक विक्रेता की ओर से भेजा गया था। परिवार ने आरोप लगाया कि नाबालिग को ऐसे खतरनाक रसायन की बिक्री और डिलीवरी में जरूरी जांच-पड़ताल नहीं की गई।
पुलिस के मुताबिक, छात्र की 28 अप्रैल को जहरीला पदार्थ खाने के बाद मौत हुई थी। शुरुआती कार्रवाई उसके पिता की शिकायत के आधार पर हुई थी। बाद में मां को मोबाइल में ऑनलाइन ऑर्डर से जुड़ा सुराग मिला, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की और अदालत का रुख किया। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने उपलब्ध दस्तावेजों और ऑर्डर से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की।
अब मामले में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और गुजरात के विक्रेता से पूछताछ की जाएगी। जांच का एक अहम पहलू यह होगा कि सल्फास जैसे जहरीले कृषि-रसायन की बिक्री के दौरान उम्र और खरीद के उद्देश्य की कोई जांच हुई थी या नहीं। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि ऑर्डर किस प्रक्रिया के तहत स्वीकार किया गया और सामान की डिलीवरी तक कौन-कौन से नियम लागू थे।
इस घटना ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खतरनाक रसायनों की बिक्री और नाबालिगों तक उनकी पहुंच को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में FIR दर्ज होना आरोपों की जांच की शुरुआत है; विक्रेता या प्लेटफॉर्म की कानूनी जिम्मेदारी जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में तय होगी।