आगरा में नरम पत्थर से बनाया जा रहा था ब्रांडेड आटा, 13.5 क्विंटल की खेप जब्त

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आगरा , 13 अगस्त 2026 । आगरा में खाद्य सुरक्षा और मिलावट के खिलाफ कार्रवाई के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कथित तौर पर नरम पत्थर से ब्रांडेड आटा तैयार किए जाने की सूचना के बाद टीम ने छापेमारी कर करीब 13.5 क्विंटल संदिग्ध सामग्री और तैयार खेप जब्त की। कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और खाद्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी।

यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा आयुक्त एवं औषधि प्रशासन, लखनऊ और जिलाधिकारी आगरा के निर्देश पर मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। निरीक्षण के समय प्रतिष्ठान पर अमित कुमार निवासी जौतना डाबर रोड मौजूद मिले। जांच में सामने आया कि फर्म को खाद्य तेल के फुटकर विक्रेता और खाद्य मसालों के थोक विक्रेता के रूप में लाइसेंस मिला था, लेकिन वहां आटे के निर्माण का काम किया जा रहा था।

ब्रांड्स के नाम पर तैयार हो रहा था आटा

टीम ने मौके से करीब 30,150 रुपये कीमत की सेलखड़ी और 18,900 रुपये कीमत का आटा जब्त किया। समृद्धि ब्रांड आटा, उत्तम ब्रांड आटा, श्याम भोग चक्की फ्रेश आटा और सेलखड़ी पाउडर अपमिश्रक के एक-एक नमूने लिए गए हैं। इन्हें जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई होगी।

स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा

खाद्य पदार्थों में किसी भी तरह की गैर-खाद्य सामग्री मिलाना लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। खासकर आटा जैसी रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री में मिलावट का असर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

इसी कारण खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाता है। अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध खाद्य सामग्री की बिक्री और सप्लाई रोकना प्राथमिकता है, ताकि उपभोक्ताओं तक असुरक्षित उत्पाद न पहुंच सके।

मिलावट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत

आगरा में सामने आया यह मामला खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे पैकेज्ड खाद्य सामग्री खरीदते समय पैकेट की सील, लेबल, निर्माण एवं समाप्ति तिथि और अन्य जरूरी विवरणों की जांच करें।

वहीं प्रशासन के लिए ऐसे मामलों में केवल जब्ती तक सीमित रहने के बजाय सप्लाई नेटवर्क की जांच करना भी जरूरी है, ताकि मिलावटी या संदिग्ध खाद्य सामग्री तैयार करने वाले पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

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