नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026 । अमेरिका जाने की चाहत में एक शख्स ने कथित तौर पर वीजा प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया, लेकिन उसका यह शॉर्टकट भारी पड़ गया। अमेरिकी वीजा हासिल करने के लिए वह फर्जी डिग्री और बैंक बैलेंस से जुड़े दस्तावेज लेकर US Embassy पहुंचा। जांच के दौरान दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने के बाद उसके खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है।
बताया जा रहा है कि आरोपी ने अमेरिका जाने के लिए अपनी शैक्षणिक योग्यता और आर्थिक स्थिति को मजबूत दिखाने की कोशिश की। इसके लिए कथित तौर पर फर्जी डिग्री और बैंक बैलेंस से संबंधित दस्तावेज तैयार किए गए। वीजा प्रक्रिया के दौरान जब संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई तो उनमें कथित तौर पर कई विसंगतियां सामने आईं।
मामला तब खुला जब 7 अगस्त को दिल्ली स्थित US Embassy में वीजा इंटरव्यू के दौरान युवक से दस्तावेजों के बारे में सवाल किए गए। पूछताछ में उसने कथित तौर पर खुद ही मान लिया कि उसने राजस्थान की एक यूनिवर्सिटी की B.Com (Computers) की फर्जी डिग्री और कई दूसरे दस्तावेज जमा किए थे। इसके बाद Embassy की शिकायत पर 8 अगस्त को चाणक्यपुरी पुलिस ने FIR दर्ज की और युवक को पुलिस के हवाले कर दिया।
फर्जी डिग्री का पूरा सेट
- युवक ने राजस्थान की एक यूनिवर्सिटी से B.Com (Computers) करने का दावा किया था।
- उसने डिग्री, मार्कशीट, ट्रांसक्रिप्ट, सेमेस्टर ग्रेड रिपोर्ट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और प्रोविजनल सर्टिफिकेट जमा किए।
- इंटरव्यू में उसने कथित तौर पर माना कि उसने यूनिवर्सिटी में कभी क्लास ही नहीं की थी।
- उसके मुताबिक ये कागज विजयवाड़ा के वीजा एजेंट नितिन ने उसे दिए थे।
नौकरी भी दिखाई ज्यादा
- युवक ने एक कंपनी का अपरेजल लेटर दिया, जिसमें 35 हजार रुपये महीने की सैलरी बताई गई थी।
- एक्सपीरींअस लेटर में दावा किया गया कि उसने 27 दिसंबर 2023 से 31 जुलाई 2026 तक वहां काम किया।
- पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि उसने कंपनी में सिर्फ 2 से 2.5 महीने काम किया था।
- उसने कहा कि कंपनी उसके अंकल की है और नौकरी से जुड़े दस्तावेज भी उन्होंने दिए थे।
खाते में दिखाए 95 लाख
- वीजा आवेदन में 1.2 करोड़ रुपये की संपत्ति वाला नेट-वर्थ सर्टिफिकेट लगाया गया।
- बैंक दस्तावेजों में 45 लाख और 50 लाख रुपये का बैलेंस दिखाया गया।
- युवक ने कथित तौर पर माना कि बैंक स्टेटमेंट भी फर्जी था और एजेंट नितिन के कहने पर तैयार किया गया था।
उधार लेकर बढ़ाया बैंक बैलेंस
- शिकायत के मुताबिक, परिवार ने बैंक खातों में ज्यादा रकम दिखाने के लिए पैसे उधार लिए थे।
- यह रकम नेट-वर्थ सर्टिफिकेट में कर्ज के रूप में दिखाई नहीं गई थी।
- Embassy ने आरोप लगाया कि युवक ने एजेंट और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर फर्जी बैंक, शिक्षा, नौकरी और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज तैयार किए।
- Embassy अधिकारी ने कहा कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल US सरकार और Embassy को गलत जानकारी देकर वीजा हासिल करने के लिए किया गया।
FIR के बाद जांच तेज
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का फोकस फर्जी डिग्री और बैंक बैलेंस से जुड़े दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने पर भी है। यदि जांच में किसी एजेंट या संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो मामले में अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
विदेश जाने के लिए वैध और सत्यापित दस्तावेजों का इस्तेमाल करना जरूरी है। फर्जी प्रमाणपत्र या गलत वित्तीय जानकारी देकर वीजा हासिल करने की कोशिश न केवल आवेदन को प्रभावित कर सकती है, बल्कि संबंधित व्यक्ति को कानूनी मुश्किलों में भी डाल सकती है।