दिल्ली के विकास फंड पर CAG का बड़ा खुलासा

पूंजीगत संपत्तियों पर सिर्फ 6 से 27% खर्च

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नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026 । दिल्ली के विकास फंड के इस्तेमाल को लेकर CAG की ताजा रिपोर्ट ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के स्थानीय निकायों को विकास और स्थायी परिसंपत्तियां तैयार करने के लिए मिलने वाली राशि का बड़ा हिस्सा पूंजीगत कार्यों पर खर्च होने के बजाय वेतन, पेंशन और रखरखाव जैसे नियमित खर्चों में चला गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग स्थानीय निकायों में पूंजीगत परिसंपत्तियों पर खर्च का हिस्सा महज 6% से 27% तक रहा, जबकि कुछ मामलों में करीब 94% राशि रेकरिंग खर्चों में इस्तेमाल हुई।

विकास के लिए मिले पैसे का उद्देश्य क्या था?

विकास फंड का मूल उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ऐसी परिसंपत्तियां और बुनियादी ढांचा तैयार करना होता है, जिनका लंबे समय तक जनता को फायदा मिले। इनमें सड़क, नाली, सार्वजनिक सुविधाएं, भवन, पार्क और अन्य स्थायी ढांचागत काम शामिल हो सकते हैं। लेकिन CAG की रिपोर्ट में सामने आया आंकड़ा बताता है कि फंड का अपेक्षित हिस्सा पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण में नहीं लगाया गया।

वेतन और रखरखाव पर क्यों खर्च हुई इतनी रकम?

रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय निकायों के खर्च का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन-पेंशन और रखरखाव जैसे नियमित खर्चों में गया। ऐसे खर्च प्रशासन चलाने के लिए जरूरी हो सकते हैं, लेकिन विकास फंड के संदर्भ में सवाल यह है कि क्या इसके लिए निर्धारित राशि का इतना बड़ा हिस्सा इन्हीं मदों में जाना चाहिए था।

अगर विकास के लिए मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा नियमित खर्चों में चला जाए, तो नई सड़क, भवन, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए उपलब्ध धन सीमित हो जाता है। यही स्थिति CAG की आपत्तियों का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।

94% तक खर्च ने खड़े किए सवाल

सबसे बड़ा सवाल उस स्थिति को लेकर है जहां पूंजीगत परिसंपत्तियों पर खर्च केवल 6% रहा। इसका अर्थ है कि कुल फंड का लगभग 94% हिस्सा अन्य, मुख्यतः रेकरिंग खर्चों में इस्तेमाल हुआ। हालांकि अलग-अलग स्थानीय निकायों में खर्च का अनुपात अलग रहा और रिपोर्ट में पूंजीगत खर्च 6% से 27% के बीच बताया गया है।

यह आंकड़ा दिल्ली में स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन और विकास योजनाओं की प्राथमिकताओं पर बहस को बढ़ा सकता है।

विधानसभा में पेश हुई CAG रिपोर्ट

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र में CAG की रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट सामने आने के बाद विकास फंड के आवंटन और उसके वास्तविक इस्तेमाल को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

CAG की रिपोर्ट का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह सरकारी धन के इस्तेमाल और निर्धारित उद्देश्यों के बीच अंतर को सामने लाती है। अब स्थानीय निकायों की वित्तीय प्राथमिकताओं और भविष्य में फंड के बेहतर इस्तेमाल को लेकर सरकार से जवाबदेही की उम्मीद की जा सकती है।

आगे क्या होगा?

CAG की रिपोर्ट के बाद दिल्ली सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि विकास के लिए निर्धारित फंड का इस्तेमाल वास्तव में स्थायी परिसंपत्तियों और बुनियादी ढांचे के निर्माण में बढ़ाया जाए। साथ ही, स्थानीय निकायों के वेतन, पेंशन और रखरखाव जैसे जरूरी खर्चों के लिए अलग वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पड़ सकती है।

कुल मिलाकर, CAG का यह खुलासा दिल्ली में विकास फंड के इस्तेमाल, स्थानीय निकायों की वित्तीय प्राथमिकताओं और सार्वजनिक धन की निगरानी पर गंभीर सवाल उठाता है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सरकार रिपोर्ट की आपत्तियों पर क्या कार्रवाई करती है और भविष्य में विकास फंड का कितना हिस्सा वास्तव में स्थायी परिसंपत्तियां बनाने पर खर्च किया जाता है।

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