संभल के डाकघरों में 1.40 करोड़ का गबन, सहायक पोस्ट मास्टर गिरफ्तार

Dream11 की लत में डुबोई बचत योजनाओं की रकम

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संभल, 08 अगस्त 2026 । संभल जिले में डाक विभाग से जुड़ा करीब 1.40 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। आरोप है कि डाकघर में तैनात एक सहायक पोस्ट मास्टर ने बचत योजनाओं के खाताधारकों की रकम में हेराफेरी कर उसे ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म Dream11 में लगा दिया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी सहायक पोस्ट मास्टर को गिरफ्तार कर लिया है।

मामले में अब अन्य संभावित आरोपियों और पूरे वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि प्रभावित खाताधारकों की वास्तविक संख्या कितनी है और कहीं अन्य डाकघरों में भी इसी तरह की अनियमितताएं तो नहीं हुईं। आरोपी के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी गहन पड़ताल की जा रही है।

बचत योजनाओं की रकम पर लगाया हाथ

आरोप है कि आरोपी ने डाकघर में लोगों की मेहनत की कमाई से जमा रकम में फर्जीवाड़ा किया। जिन लोगों ने डाकघर की बचत योजनाओं में अपना पैसा जमा किया था, उनकी रकम को कथित तौर पर गलत तरीके से निकालकर दूसरे काम में इस्तेमाल किया गया। शुरुआती जांच में गबन की रकम करीब 1.40 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

मामला सामने आने के बाद डाक विभाग के अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया। विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड और खातों की जांच की गई, जिसके बाद वित्तीय अनियमितताओं का पता चला।

Dream11 की लत में गंवाई करोड़ों की रकम

जांच में कथित तौर पर सामने आया कि आरोपी को ऑनलाइन फैंटेसी गेमिंग प्लेटफॉर्म Dream11 पर पैसे लगाने की लत थी। इसी लत को पूरा करने के लिए उसने डाकघर की बचत योजनाओं से जुड़ी रकम का दुरुपयोग किया। लगातार पैसे गंवाने के बाद भी आरोपी कथित तौर पर रकम लगाता रहा और देखते ही देखते गबन की राशि करोड़ों तक पहुंच गई।

इस मामले ने सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों में जमा लोगों की बचत की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

खाताधारकों के पैसों की सुरक्षा पर सवाल

डाकघर की बचत योजनाओं में आमतौर पर बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम आय वर्ग के लोग निवेश करते हैं। लोग डाकघर को सुरक्षित बचत और निवेश का माध्यम मानते हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला सामने आने से खाताधारकों के बीच चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

मामले की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी ने कितने खातों से रकम निकाली और किन तरीकों से रिकॉर्ड में हेरफेर किया। इसके अलावा इस पूरे मामले में किसी अन्य कर्मचारी या व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा सकती है।

विभागीय जांच के साथ पुलिस कार्रवाई

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। वहीं डाक विभाग की ओर से भी रिकॉर्ड का मिलान और आंतरिक जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद गबन की वास्तविक रकम और फर्जीवाड़े के पूरे तरीके की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि सरकारी वित्तीय संस्थानों में कर्मचारियों द्वारा खातों के संचालन और पैसों के लेनदेन की निगरानी कितनी प्रभावी है। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी लंबे समय तक कैसे चलती रही।

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