चंडीगढ़, 30 जुलाई 2026 । कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक फैसले को लेकर सवाल उठाते हुए अमृतसर से हवाई सेवाओं के मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि यदि यात्री अमृतसर में चेक-इन कर सकते हैं और उनकी फ्लाइट दिल्ली से संचालित हो सकती है, तो ऐसी व्यवस्था को लागू करने में आखिर कौन-सी बाधा आ रही है। उन्होंने इस मुद्दे को यात्रियों की सुविधा और पंजाब की हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ते हुए मंत्रालय से स्पष्ट नीति अपनाने की मांग की।
मनीष तिवारी ने पूछा, क्या चीज रोक रही है
केंद्रीय मंत्री के इस ऐलान पर चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सवाल खड़ा किया है और पूछा है कि चंडीगढ़ और अमृतसर एयरपोर्ट को ‘पॉइंट्स ऑफ कॉल’ (POC) के तौर पर क्यों नहीं चुना जा रहा है। उन्हें द्विपक्षीय ऑफर लिस्ट में क्यों नहीं डाला जा रहा है, ताकि भारतीय एयरलाइंस के साथ-साथ विदेशी एयरलाइंस भी इन दोनों जगहों से उड़ान भर सकें? मैंने व्यक्तिगत रूप से आपसे मिलकर ऐसा करने का अनुरोध किया था और इस बारे में आपको पत्र भी लिखा था। श्री आनंदपुर साहिब के सांसद के तौर पर मैंने 2019-2024 के बीच आपके पूर्ववर्ती मंत्रियों के साथ भी इस मामले को उठाया था। ऐसा क्यों नहीं हो रहा है? क्या चीज इसे रोक रही है? असली मुद्दा यही है।
मनीष तिवारी का कहना है कि अमृतसर उत्तर भारत का एक प्रमुख धार्मिक, पर्यटन और व्यावसायिक केंद्र है, जहां से बड़ी संख्या में यात्री देश और विदेश की यात्रा करते हैं। उनका तर्क है कि यदि चेक-इन और बैगेज जैसी सुविधाएं अमृतसर में उपलब्ध करा दी जाएं, तो यात्रियों को दिल्ली में अनावश्यक परेशानी और समय की बर्बादी से राहत मिल सकती है। उन्होंने पूछा कि ऐसी व्यवस्था लागू करने में तकनीकी, प्रशासनिक या नीतिगत स्तर पर आखिर कौन-सी बाधा है।
उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर हवाई संपर्क से पंजाब के पर्यटन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। खासकर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और प्रवासी भारतीयों के लिए यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकती है। उनका मानना है कि यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय को इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
अब इस मुद्दे पर सभी की नजर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के जवाब पर है। यदि मंत्रालय इस संबंध में कोई नई नीति या व्यवस्था लागू करता है, तो इसका लाभ पंजाब सहित उत्तर भारत के हजारों यात्रियों को मिल सकता है। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और विमानन क्षेत्र दोनों में चर्चा का विषय बना हुआ है।