ओवैसी को साथ न लेने से क्या INDIA ब्लॉक को यूपी में होगा नुकसान? जानिए राजनीतिक समीकरण
लखनऊ, 28 जुलाई 2026 । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की इच्छा जताई है। हालांकि, अब तक समाजवादी पार्टी और INDIA ब्लॉक की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सपा नेतृत्व ओवैसी से दूरी बनाए रखने और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के साथ-साथ “सॉफ्ट हिंदुत्व” की छवि पर अधिक ध्यान दे रहा है।
बीजेपी की ‘बी टीम’ का ठप्पा
ओवैसी भारतीय जनता पार्टी (BJP) का विरोध कर रहे हैं और उनके वक्तव्यों में एआईएमआईएम का संकल्प साफ दिख रहा है। हालांकि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में उनका पार्टी को बीजेपी की ‘बी टीम’ का लेबल मिलने की वजह से यूपी के चुनाव में उनकी पार्टी के इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनने की संभावनाओं पर असर पड़ने की आशंका है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी को साथ न लेने के दो संभावित प्रभाव हो सकते हैं। एक ओर, INDIA ब्लॉक मुस्लिम मतों के बंटवारे का जोखिम उठाता है, खासकर उन सीटों पर जहां AIMIM का कुछ प्रभाव है। दूसरी ओर, सपा और उसके सहयोगी यह भी मान सकते हैं कि ओवैसी के साथ औपचारिक गठबंधन से भाजपा को “ध्रुवीकरण” का राजनीतिक मुद्दा मिल सकता है, जिससे अन्य सामाजिक वर्गों में विपक्ष की स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है।
मुसलमान अब समाजवादी पार्टी के पीछे नहीं चलेंगे
मुरादाबाद में असदुद्दीन ओवैसी और भी साफ-साफ बोले। उन्होंने कहा, ‘मजलिस नहीं चाहती कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी दोबारा सरकार बनाए। मैं हाथ मिलाने को तैयार हूं। मैं गठबंधन करने को तैयार हूं। आज बात करने का समय है। चुनाव खत्म होने के बाद रोना मत।’ ओवैसी ने कहा, ‘मुसलमान अब समाजवादी पार्टी के पीछे नहीं चलेंगे और अगर अखिलेश कुर्सी पर बैठेंगे, तो ओवैसी भी उनके सामने कुर्सी पर बैठेंगे।’ ओवैसी की इस बात पर सभा में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं और उत्साह दिखाया।
हालांकि, यह कहना कि ओवैसी को साथ न लेने से INDIA ब्लॉक को निश्चित रूप से नुकसान होगा, अभी जल्दबाजी होगी। उत्तर प्रदेश का चुनावी परिणाम कई कारकों पर निर्भर करेगा—उम्मीदवार चयन, स्थानीय समीकरण, गठबंधन की मजबूती, मतदान प्रतिशत, जातीय और क्षेत्रीय समीकरण तथा चुनाव प्रचार की रणनीति। AIMIM का प्रभाव भी पूरे प्रदेश में समान नहीं है और कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक अधिक सीमित माना जाता है।
इसलिए फिलहाल यह एक राजनीतिक संभावना है, न कि स्थापित तथ्य। चुनावी नतीजे ही बताएंगे कि INDIA ब्लॉक की मौजूदा रणनीति कितनी प्रभावी रहती है और ओवैसी के साथ गठबंधन न करने का वास्तविक चुनावी असर कितना पड़ता है।