गौरीगंज सीट पर अखिलेश की नजर
अमेठी, 28 जुलाई 2026 । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं और अमेठी की गौरीगंज विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव इस सीट पर विशेष रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इसके पीछे पूर्व विधायक राकेश प्रताप सिंह की बगावत, बदलते स्थानीय समीकरण और हिंदुत्व व ‘सनातन’ से जुड़े राजनीतिक विमर्श को अहम कारण माना जा रहा है।
कांटे की होती रही है टक्कर
गौरीगंज विधानसभा सीट के इतिहास में जीत-हार का अंतर कई बार इतना मामूली रहा है, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंकाया है। 1991 में भाजपा उम्मीदवार तेजभान सिंह ने महज 189 मतों से चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। 1996 में तेजभान सिंह ने एक बार फिर भाजपा के टिकट पर कड़े मुकाबले में 602 वोटों से जीत दर्ज की। 2002 में कांग्रेस प्रत्याशी नूर मोहम्मद ने 267 वोटों के बेहद कम मार्जिन से जीत हासिल की।
गौरीगंज सीट का राजनीतिक इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। यहां मुकाबले अक्सर कांटे के रहे हैं और बहुत कम नेता लगातार दोबारा जीत हासिल कर पाए हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाने के बाद राकेश प्रताप सिंह और समाजवादी पार्टी के बीच दूरी बढ़ी, जिससे इस सीट पर नए राजनीतिक समीकरण बनने लगे। ऐसे में सपा के सामने मजबूत उम्मीदवार चुनने और संगठन को एकजुट रखने की चुनौती है।
विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों के साथ-साथ व्यापक मतदाता वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं भाजपा भी इस सीट को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल किए हुए है और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दे रही है। ऐसे में गौरीगंज का मुकाबला 2027 के चुनाव में बेहद दिलचस्प होने की संभावना जताई जा रही है।
तीन नेता ही दोबारा जीते
गौरीगंज की जनता का मिजाज ऐसा रहा है कि यहां अधिकांश नेताओं को दूसरी बार का मौका आसानी से नहीं मिला। गौरीगंज सीट के चुनावी इतिहास में केवल तीन ही चेहरे ऐसे रहे हैं, जिन्होंने एक से अधिक बार विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया है:
- राजपती देवी (कांग्रेस):सबसे अधिक 5 बार चुनाव जीतकर इतिहास बनाया।
- तेजभान सिंह: कुल 4 बार (3 बार भाजपा और 1 बार जनता पार्टी के सिंबल पर) विधायक रहे।
- राकेश प्रताप सिंह (सपा):लगातार 3 बार (2012, 2017 और 2022) जीत दर्ज कर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की।
हालांकि, 2027 के चुनाव परिणाम को लेकर अभी कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। यह कहना कि किसी एक दल की जीत तय है या ‘भगवा’ या किसी अन्य राजनीतिक धड़े का पलड़ा भारी रहेगा, फिलहाल अटकल होगी। उम्मीदवार चयन, गठबंधन, स्थानीय मुद्दे और चुनाव प्रचार जैसे कई कारक अंतिम नतीजों को प्रभावित करेंगे।