बांकीपुर उपचुनाव में BJP की रणनीति पर सवाल

स्टार प्रचारकों और प्रत्याशी के बीच दूरी की चर्चा तेज

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पटना, 24  जुलाई 2026 ।  बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चुनावी रणनीति को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी के कई स्टार प्रचारक लगातार जनसभाएं और रोड शो कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि वे पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी के साथ बहुत कम दिखाई दे रहे हैं। इसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य है या इसके पीछे कोई रणनीतिक कारण है।

विजय सिन्हा के साथ नहीं दिखे उम्मीदवार

एक खास जाति पर विशेष पकड़ बनाए रखने वाले कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा भी बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के पक्ष में प्रचार करने निकले। इनके साथ श्रम मंत्री अरुण शंकर प्रसाद दिखे। मंत्री लेशी सिंह भी दिखी ।विधायक आनंद मिश्रा दिखे। पर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव लड़ रहा बीजेपी का दूल्हा यानी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा नहीं थे।

दिलीप जायसवाल, गिरिराज सिंह और मंगल पांडेय भी अकेले

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी बांकीपुर विधानसभा में प्रचार करते दिखे। वो प्रशांत किशोर के जमानत जब्त होने की बात कही। और नीरज कुमार सिन्हा नितिन नवीन से भी ज्यादा मतों से जीतेंगे।राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल भी बांकीपुर में प्रचार करते दिखे। इनके साथ मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल दिखे।पर इनके साथ बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा नहीं दिखे। पूर्व मंत्री मंगल पांडेय भी कंकड़बाग ,चांदमारी रोड में प्रचार करते दिखे।

विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर निशाना साध रहे हैं। उनका कहना है कि यदि पार्टी अपने उम्मीदवार के प्रति पूरी तरह आश्वस्त है, तो स्टार प्रचारकों को उनके साथ खुलकर प्रचार करना चाहिए। वहीं भाजपा की ओर से इस तरह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा जा रहा है कि चुनाव प्रचार का कार्यक्रम पहले से तय रणनीति के अनुसार चल रहा है और पार्टी के सभी नेता संगठन के निर्देशों के अनुरूप अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचार कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कई बार चुनावी अभियानों में स्टार प्रचारकों को अलग-अलग इलाकों में अधिक से अधिक मतदाताओं तक पहुंचने के उद्देश्य से स्वतंत्र कार्यक्रम दिए जाते हैं। ऐसे में किसी मंच पर प्रत्याशी की अनुपस्थिति को सीधे तौर पर राजनीतिक मतभेद से जोड़ना उचित नहीं माना जा सकता।

बांकीपुर उपचुनाव को बिहार की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सभी प्रमुख दल इस सीट पर जीत दर्ज करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। ऐसे में प्रचार अभियान, नेताओं की मौजूदगी और चुनावी रणनीति से जुड़े हर घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और मतदाताओं की नजर बनी हुई है।

आने वाले दिनों में प्रचार अभियान और तेज होने की संभावना है, जिससे यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और अन्य दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए किस तरह की रणनीति अपनाते हैं।

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