पटना, 08 जुलाई 2026 । बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार बेहद दिलचस्प हो गया है। एक ओर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर चुनावी मैदान में हैं, तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभिषेक को उम्मीदवार बनाया है। चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं।
एक सामान्य कार्यकर्ता को टिकट मिलने से भाजपा समर्थकों में गजब का उत्साह है। इससे आम लोगों में संदेश गया कि भाजपा ‘कॉमन मैन’ की पार्टी है। यहां उम्मीदवार ऊपर से थोपे नहीं जाते बल्कि जनता के बीच से निकाले जाते हैं। कायस्थ समाज इसलिए खुश है क्योंकि उनकी जाति के उम्मीदवार को टिकट मिला है। यानी जीत के लिए दो जरूरी योग्यताओं (जातीय समीकरण और जोश) को भाजपा ने पहले चरण में ही हासिल कर लिया है।
अभिषेक नया चेहरा, विरोधियों के पास कहने के लिए कुछ नहीं
अभिषेक का मुकाबला जन सुराज के प्रशांत किशोर और राजद की रेखा गुप्ता से है। अभिषेक नया चेहरा हैं और उनके खिलाफ कहने के लिए विरोधियों के पास बहुत कुछ नहीं है। प्रशांत किशोर एक रणनीतिकार के रूप में चर्चित हैं लेकिन एक नेता के रूप में बेहद असफल हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में उनके वादों और दावों पर जनता ने बिल्कुल भरोसा नहीं किया।
चुनावी माहौल के बीच “अगर जन सुराज हारा तो न तंबू बचेगा, न बंबू” जैसे राजनीतिक बयान भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। समर्थक इसे चुनावी जोश और आत्मविश्वास का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे महज राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहा है।
बांकीपुर सीट पर मुकाबले को केवल एक विधानसभा उपचुनाव नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा और नई राजनीतिक ताकतों की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है, वहीं भाजपा इस सीट को अपने कब्जे में बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
30 जुलाई को होने वाले मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों पर पूरे राज्य की नजर है। चुनाव परिणाम यह संकेत दे सकते हैं कि बिहार की राजनीति में नई राजनीतिक ताकतों के लिए कितनी जमीन तैयार हुई है।