नई दिल्ली, 01 जुलाई 2026 । दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 17 वर्षीय नाबालिग को अपने पिता को लिवर का हिस्सा दान करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने मामले की विशेष परिस्थितियों, चिकित्सा विशेषज्ञों की राय और परिवार की स्थिति पर विचार करने के बाद यह आदेश पारित किया। इस फैसले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे पिता के इलाज का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्य बातें..
- दिल्ली हाई कोर्ट ने 17 साल के नाबालिग को बीमार पिता की जान बचाने के लिए लिवर दान करने की इजाजत दी।
- कोर्ट ने कहा कि असाधारण परिस्थितियों और कड़े मानकों के तहत नाबालिग का जीवित अंगदान संभव है।
- मामले में बेटे के अलावा कोई और डोनर नहीं था।
- लड़का बिना किसी दबाव या लाभ के, केवल अपनी इच्छा और प्रेम से अंगदान कर रहा है।
- नाबालिग की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए पूरी प्रक्रिया कड़े प्रोटोकॉल के तहत करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष चिकित्सा रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय प्रस्तुत की गई, जिसमें प्रत्यारोपण की आवश्यकता और नाबालिग की चिकित्सकीय उपयुक्तता का उल्लेख किया गया। हाई कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि अंगदान का निर्णय किसी दबाव, लालच या अनुचित प्रभाव के बिना स्वेच्छा से लिया गया है तथा इससे संबंधित सभी कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।
यह फैसला विशेष परिस्थितियों में न्यायालय द्वारा मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का उदाहरण माना जा रहा है। अब संबंधित अस्पताल और अधिकृत चिकित्सा बोर्ड की निगरानी में निर्धारित नियमों के अनुसार लिवर प्रत्यारोपण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।