देहरादून, 30 जून् 2026 । उत्तराखंड सरकार ने राज्य की अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त करने और उसकी जगह ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ लागू करने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के प्रशासन, नियमन और शैक्षणिक गुणवत्ता को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाना है।
इसके बाद सभी मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता लेनी होगी। उन्हें राज्य शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम भी लागू करना होगा। मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को एनसीईआरटी की बुक्स मिलेंगी। इस बदलाव के साथ ही मदरसों में पीएम पोषण योजना यानी मिड-डे मील को लेकर भी सख्त शर्त लागू हो जाएगी। अब वही मदरसे और अन्य अल्पसंख्यक स्कूल इस योजना का फायदा उठा सकेंगे, जो विद्यालयी शिक्षा विभाग से संबद्ध होंगे। बिना संबद्धता वाले संस्थानों को यह सुविधा नहीं मिलेगी। इस बदलाव का दायरा सिर्फ मुस्लिम समुदाय के मदरसों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी समुदायों के शिक्षण संस्थान भी अब इसी प्राधिकरण के अंतर्गत आ गए हैं।
सरकार के अनुसार, नया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मदरसों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य के विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों से जुड़े प्रशासनिक और नियामकीय कार्यों की निगरानी करेगा। इससे संस्थानों के पंजीकरण, मान्यता, निरीक्षण और शैक्षणिक मानकों को एकीकृत ढांचे के तहत संचालित करने की योजना है।
इस बदलाव के बाद वर्तमान में संचालित मदरसों को नए प्राधिकरण द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। सरकार का कहना है कि छात्रों की पढ़ाई, परीक्षाओं और प्रमाणपत्रों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा आवश्यक संक्रमण (ट्रांजिशन) प्रक्रिया के माध्यम से नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
हालांकि, इस फैसले को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ इसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ संगठनों ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
अब सभी की नजर सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले विस्तृत दिशा-निर्देशों पर है, जिनमें यह स्पष्ट होगा कि नया प्राधिकरण कब से पूरी तरह कार्यभार संभालेगा और मदरसों के संचालन, मान्यता तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में क्या-क्या बदलाव किए जाएंगे।