पंजाब के सरपंचों के लिए बड़ी सौगात: अब हर महीने मिलेंगे ₹10,000, CM भगवंत मान का ऐलान

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चंडीगढ़, 25 जून्‌ 2026 । पंजाब सरकार ने ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाने और ग्रामीण विकास को नई गति देने के उद्देश्य से सरपंचों के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की है कि राज्य के सरपंचों को अब हर महीने ₹10,000 का मानदेय दिया जाएगा। इस फैसले को ग्रामीण प्रशासन को सशक्त बनाने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बठिंडा में भगवंत मान का बड़ा ऐलान

बठिंडा में आयोजित सरपंच मिलनी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम भगवंत सिंह मान ने कहा कि 15 अगस्त को देश आजाद हुआ था और 15 अगस्त 2027 को देश को आजाद हुए 80 साल हो जाएंगे। 15 अगस्त को देश आजाद हुआ और देश में लोकतंत्र की नींव रखी गई। लोकतंत्र की नींव की पहली ईंट सरपंच होते हैं, लेकिन सरपंचों को ही सबसे ज्यादा बदनाम करके रख दिया गया है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरपंच मुझे अपना छोटा-बड़ा भाई, बेटा या भतीजा समझें। इस 15 अगस्त से हर एक सरपंच के खाते में 10 हजार रुपये मिला करेंगे। इसे 10 हजार रुपये मानदेय कह लें, वेतन कह लें या चाय-पानी कह लें, जो मर्जी कह लें, अब सरपंचों को हर महीने 10 हजार रुपये मिला करेंगे।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि गांवों के विकास, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय समस्याओं के समाधान में सरपंचों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उन्हें आर्थिक रूप से सहयोग देना आवश्यक है ताकि वे अधिक प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कार्यों में और मजबूती आएगी।

इस घोषणा के बाद केजरीवाल  ने भी मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह फैसला गांवों के विकास और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। केजरीवाल ने उम्मीद जताई कि इससे सरपंचों का मनोबल बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से सरपंचों के मानदेय को लेकर मांग उठती रही है। कई पंचायत प्रतिनिधियों का कहना था कि विकास कार्यों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्हें पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिलती। ऐसे में सरकार के इस फैसले को पंचायत प्रतिनिधियों के लिए राहत और सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस घोषणा की व्यापक चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पंचायत व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी तथा गांवों के विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी और जवाबदेही बढ़ेगी।

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