चंडीगढ़ , 25 जून् 2026 । हरियाणा की राजनीतिक यात्रा, सामाजिक बदलावों और सत्ता के बदलते समीकरणों को समेटने वाली वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक दीपकमल सहारण की पुस्तक ‘चौपाल से चंडीगढ़’ चर्चा का विषय बनी हुई है। यह पुस्तक हरियाणा की राजनीति के विभिन्न दौरों, प्रमुख नेताओं, चुनावी घटनाक्रमों और ग्रामीण समाज से लेकर सत्ता के गलियारों तक के सफर को विस्तार से प्रस्तुत करती है।
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक दीपकमल सहारण की पुस्तक ‘चौपाल से चंडीगढ़’ हरियाणा की इसी बहुआयामी राजनीतिक यात्रा को समग्र रूप से प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। लगभग 500 से अधिक पृष्ठों में फैली यह पुस्तक हरियाणा विधानसभा चुनावों के 75 वर्षों के इतिहास को व्यवस्थित ढंग से पाठकों के सामने रखती है।
पुस्तक में हरियाणा के राजनीतिक इतिहास को केवल घटनाओं के क्रम के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों के साथ जोड़कर समझाने का प्रयास किया गया है। लेखक ने राज्य की राजनीति में उभरे विभिन्न नेताओं, दलों और आंदोलनों की भूमिका का विश्लेषण करते हुए उन परिस्थितियों को भी रेखांकित किया है, जिन्होंने हरियाणा की राजनीतिक दिशा तय की।
‘चौपाल से चंडीगढ़’ की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जा रही है कि इसमें राजनीतिक घटनाओं के साथ-साथ ग्रामीण समाज की सोच, किसानों के मुद्दे, जातीय समीकरण, चुनावी रणनीतियां और प्रशासनिक बदलावों का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है। यही कारण है कि इसे केवल एक राजनीतिक पुस्तक नहीं, बल्कि हरियाणा के सामाजिक-राजनीतिक विकास का दस्तावेज माना जा रहा है।
शिक्षाविदों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पुस्तक शोधार्थियों, पत्रकारिता के छात्रों, राजनीतिक विज्ञान के विद्यार्थियों और हरियाणा की राजनीति को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए उपयोगी संदर्भ ग्रंथ साबित हो सकती है। इसमें संकलित तथ्य और विश्लेषण भविष्य के शोध कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राजनीतिक इतिहास और समकालीन घटनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करने के कारण यह पुस्तक व्यापक पाठक वर्ग का ध्यान आकर्षित कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हरियाणा की राजनीति को समझने के लिए यह पुस्तक आने वाले वर्षों में एक महत्वपूर्ण संदर्भ स्रोत के रूप में देखी जा सकती है।