लखनऊ अग्निकांड के बाद कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई को लेकर अखिलेश यादव का हमला
लखनऊ, 25 जून् 2026 । लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद अवैध और नियमों का पालन न करने वाले कोचिंग संस्थानों पर प्रशासन की सख्ती के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इतने बड़े पैमाने पर खामियां मौजूद थीं, तो सरकार पिछले 10 वर्षों से क्या कर रही थी और अब अचानक कार्रवाई क्यों की जा रही है।
बुधवार रात ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यादव ने कहा, “अब भाजपा सरकार ‘कोचिंग बंदी’ ले आई।” उन्होंने कहा, ”भाजपा अपना भ्रष्टाचार छिपाने के लिए जनता को सुरक्षा मानकों के नाम पर परेशान कर रही है। माना कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए लेकिन क्या पिछले 10 साल से सरकार सो रही थी। सरकार के पास एक दिन में इतना स्टाफ कहां से आया कि पूरे प्रदेश में हज़ारों लोगों को जांच के बाद नोटिस थमा दिया गया।” उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाया, ”सच्चाई यह है कि अब सुरक्षा मानकों और अनुमति आदि के नाम पर करोड़ों रुपये की उगाही का खेल शुरू हो गया है। भाजपाई आपदा में सम्पदा ढूंढ़ लेते हैं।”
अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन किसी हादसे के बाद ही प्रशासन का सक्रिय होना व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को पहले ही कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा, फायर सेफ्टी और भवन मानकों की नियमित जांच सुनिश्चित करनी चाहिए थी।
सपा प्रमुख का कहना है कि लखनऊ अग्निकांड जैसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं और इनके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक लापरवाही की जिम्मेदारी तय किए बिना केवल संस्थानों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा। सरकार को यह बताना चाहिए कि वर्षों तक नियमों के उल्लंघन पर निगरानी क्यों नहीं रखी गई।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि हादसे के बाद पूरे प्रदेश में व्यापक जांच अभियान चलाया जा रहा है। कई जिलों में कोचिंग संस्थानों, स्कूलों और व्यावसायिक भवनों की फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच की जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को नोटिस जारी किए गए हैं और आवश्यकतानुसार सीलिंग तथा अन्य कार्रवाई भी की जा रही है।
लखनऊ अग्निकांड के बाद सुरक्षा मानकों को लेकर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ छात्रों और अभिभावकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और सख्त अनुपालन ही भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।