“सपा का समाजवाद असल में यादववाद है”
अखिलेश यादव पर बरसे असदुद्दीन ओवैसी, मुस्लिम मुद्दों को लेकर साधा निशाना
लखनऊ, 24 जून् 2026 । उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश याद पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का समाजवाद वास्तव में “यादववाद” बनकर रह गया है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि सपा मुस्लिम समुदाय के वोट तो लेती है, लेकिन उनके महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर आवाज नहीं उठाती।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव जिस तरह से बीजेपी शासित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगे कथित आरोपों को लेकर उनके बचाव में कूद पड़े हैं, उसपर असदुद्दीन ओवैसी भड़क गए हैं। उनका कहना है कि अखिलेश यादव को यहां भी सिर्फ यादव जाति की ही चिंता है और मुसलमानों के साथ कुछ भी हो जाए, उन्हें कोई मतलब नहीं।
‘मोहनजी के सम्मान में, अखिलेश भैया मैदान में’
असदुद्दीन ओवैसी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के बचाव में आए अखिलेश यादव के बयान पर छपी एक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा है, ‘मोहनजी के सम्मान में, अखिलेश भैया मैदान में। एक भाई बस अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।’
ओवैसी ने अपने बयान में कहा कि जब मुसलमानों से जुड़े सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक मुद्दों की बात आती है, तब समाजवादी पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व की ओर से अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं देती। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का राजनीतिक और संगठनात्मक ढांचा एक विशेष सामाजिक वर्ग के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जबकि अन्य समुदायों को केवल चुनावी समर्थन तक सीमित रखा जाता है।
AIMIM प्रमुख ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय के सामने शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे कई गंभीर मुद्दे हैं, लेकिन इन विषयों पर सपा का रुख अक्सर स्पष्ट नहीं दिखाई देता। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय मुस्लिम वोटों की बात होती है, लेकिन बाद में उनकी समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दी जाती।
वहीं, समाजवादी पार्टी लगातार दावा करती रही है कि वह सभी वर्गों और समुदायों के हितों की राजनीति करती है तथा सामाजिक न्याय की विचारधारा पर चलती है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सपा ने अपने शासनकाल में पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और किसानों के लिए कई योजनाएं लागू की थीं।
ओवैसी के इस बयान को आगामी चुनावी समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर आने वाले समय में और तेज हो सकता है। ऐसे में यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।