3000 किलो ड्रग्स इंपोर्ट केस में ED का बड़ा शिकंजा

दिल्ली में 5 ठिकानों पर छापेमारी, नाइट क्लब नेटवर्क की जांच तेज

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नई दिल्ली, 24 जून्‌ 2026 । भारत में हाल के वर्षों में सामने आए सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी मामलों में से एक 3000 किलो ड्रग्स इंपोर्ट केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली के पांच अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस विशाल ड्रग्स नेटवर्क का संबंध राजधानी के कई हाई-प्रोफाइल नाइट क्लबों, इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों और हवाला चैनलों से हो सकता है। इसी कड़ी में वित्तीय लेन-देन, संदिग्ध बैंक खातों और संपत्तियों की भी गहन जांच की जा रही है।

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत चल रही जांच के सिलसिले में दिल्ली में हरप्रीत सिंह तलवार, शमशुद्दीन और उनके साथियों से जुड़े 5 ठिकानों पर छापेमारी की है। इन जगहों पर तलाशी जारी है। बताया जा रहा है कि ड्रग्स से कमाए गए पैसे को दिल्ली के नाइट क्लबों में लगाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, हरप्रीत तलवार को पहले इसी मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार किया था और हाल ही में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया था।

अफगानिस्ता से लाई गई थी हेरोइन

बता दें कि साल 2021 में गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से करीब 3000 किलो हेरोइन जब्त की गई थी। बताया गया था कि समुद्री रास्ते से यह हेरोइन अफगानिस्तान से लाई गई। एनआईए ने पहले दिल्ली के बिजनसमैन तलवार से पूछताछ की और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया था। भारी भरकम हेरोइन की खेप की डिलीवरी और खरीद में कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। रिपोर्टों में दावा किया गया था कि कबीर तलवार अफगान नागरिकों के जरिए ड्रग्स खरीद रहा था और दुबई के रास्ते पैसे भेज रहा था। रिफाइंड ड्रग्स को कथित तौर पर बिजनसमैन द्वारा सर्कुलेट किया जाता था और ड्रग्स का बाकी हिस्सा पंजाब भेजा जाता था।

सूत्रों के अनुसार, ड्रग्स की खेप विदेशों से समुद्री और हवाई मार्ग के जरिए भारत पहुंचाई गई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि तस्करी से अर्जित करोड़ों रुपये को वैध दिखाने के लिए कई फर्जी कंपनियों और शेल फर्मों का इस्तेमाल किया गया। ED की टीम ने छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सबूत जब्त किए हैं।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क केवल ड्रग्स सप्लाई तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार देश के कई बड़े शहरों में संचालित मनोरंजन उद्योग और नाइटलाइफ कारोबार से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी कारण नाइट क्लबों में होने वाले कैश ट्रांजैक्शन, वीआईपी पार्टियों और संदिग्ध निवेशकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की पड़ताल के साथ-साथ यह भी जांच की जा रही है कि ड्रग्स तस्करी से प्राप्त धन का उपयोग किन व्यवसायों और संपत्तियों में निवेश के लिए किया गया। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और लोगों से पूछताछ तथा नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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