पटना, 22 जून् 2026 । बिहार में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। विपक्षी दलों के हमलों के बीच अब सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से भी सवाल उठने लगे हैं। जेडीयू के वरिष्ठ नेता संजय झा और भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी चौबे सहित कई नेताओं के बयानों ने मामले को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है, जिससे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
अश्विनी चौबे ने दिया तीखा बयान
पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर विवाद पर तल्ख टिप्पणी करते हुए घटना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, दर्दनाक और हृदय विदारक बताते हुए कहा कि भरत भूषण तिवारी एक निर्दोष व्यक्ति थे, जिन्होंने अपना जीवन गरीबों, अति पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों, भू-विस्थापितों और बाढ़ पीड़ितों के अधिकारों की लड़ाई में समर्पित कर दिया था।
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर शुरुआत से ही विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि पुलिस ने कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तब और तेज हो गई जब गठबंधन के कुछ नेताओं ने भी घटना को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की। संजय झा ने मामले में तथ्यों को सामने लाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि अश्विनी चौबे ने भी सार्वजनिक रूप से कुछ सवाल उठाए। इन बयानों को लेकर विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया मौका मिल गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन के भीतर से आने वाली अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती हैं। खासकर तब, जब मामला पहले से ही सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ हो। विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
इस बीच राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और यदि कहीं कोई त्रुटि या अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर भी पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
भरत तिवारी एनकाउंटर अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मामले को और अधिक चर्चा में ला सकती हैं।