चंडीगढ़, 07 अगस्त 2026 । हरियाणा में कैंसर के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान कैंसर के मामलों में लगभग 11% की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, 2025 में कैंसर से होने वाली मौतों का आंकड़ा 18 हजार के पार पहुंचने की बात सामने आई है। ये आंकड़े बताते हैं कि राज्य में कैंसर अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है।
पांच वर्षों में 3,380 नए मामले बढ़े
वर्ष 2021 में हरियाणा में अनुमानित 30,015 नए कैंसर मरीज थे, जो 2025 में बढ़कर 33,395 हो गए। यानी पांच वर्षों में 3,380 नए मामले बढ़े, जो लगभग 11.3 प्रतिशत की वृद्धि है। यह वृद्धि राष्ट्रीय औसत 10.05 प्रतिशत से भी अधिक है।
इसी अवधि में कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या 16,543 से बढ़कर 18,387 हो गई। यानी 1,844 अतिरिक्त मौतें, जो लगभग 11.1 प्रतिशत की वृद्धि है। यह भी राष्ट्रीय औसत 10.06 प्रतिशत से अधिक है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उम्र, तंबाकू और धूम्रपान का सेवन, शराब का अत्यधिक उपयोग, असंतुलित खानपान, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा, प्रदूषण और कुछ संक्रमण जैसे कई कारण कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, प्रत्येक मरीज में बीमारी के कारण अलग-अलग हो सकते हैं और सभी मामलों को किसी एक वजह से नहीं जोड़ा जा सकता।
विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी उपायों में समय पर जांच (स्क्रीनिंग), शुरुआती पहचान और शीघ्र उपचार शामिल हैं। यदि बीमारी का पता प्रारंभिक चरण में चल जाए तो कई प्रकार के कैंसर का सफल इलाज संभव है। इसलिए लोगों को शरीर में लंबे समय तक रहने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न स्तरों पर कैंसर जागरूकता अभियान, जांच शिविर, स्क्रीनिंग कार्यक्रम और उपचार सुविधाओं को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञ लोगों को तंबाकू से दूरी बनाने, संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने, स्वस्थ वजन बनाए रखने और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह देते हैं। ये उपाय कई प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य में कैंसर उपचार केंद्रों, विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और समय पर जांच की उपलब्धता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक मरीजों का शुरुआती चरण में निदान और उपचार सुनिश्चित किया जा सके।