नई दिल्ली, 23 जून् 2026 । भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की राजनीति में घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच झारखंड सरकार के एक मंत्री के बयान ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। मंत्री ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को नसीहत देते हुए कहा कि “कृपया उत्तर प्रदेश की नकल ना करें, यह बिहार है।” इस बयान के बाद एनकाउंटर की कार्रवाई और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक शैली पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में एनकाउंटर, बुलडोजर और भय की राजनीति का कोई स्थान नहीं है। बिहार भगवान बुद्ध, महावीर, जेपी और कर्पूरी ठाकुर की धरती है, जहां की राजनीति सामाजिक न्याय, संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित रही है। कानून का शासन संविधान के दायरे में होना चाहिए, न कि दमन के बल पर।
झारखंड के मंत्री ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का राज सर्वोपरि होना चाहिए और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई संविधान और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में रहकर की जानी चाहिए। उनका कहना था कि राज्यों की परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं और किसी दूसरे राज्य की कार्यप्रणाली को हूबहू अपनाने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फैसले लिए जाने चाहिए।
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पहले से ही विपक्ष सरकार को घेर रहा है। कई राजनीतिक दल इस मामले की निष्पक्ष और न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह की आशंका या विवाद को दूर किया जा सके।
दूसरी ओर, बिहार सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं का कहना है कि पुलिस कानून के तहत काम कर रही है और अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सरकार का दावा है कि किसी भी कार्रवाई में कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और जांच एजेंसियां मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
झारखंड मंत्री के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष इसे सरकार की कार्यशैली पर सवाल के रूप में पेश कर रहा है, जबकि सत्तापक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आने वाले दिनों में एनकाउंटर विवाद को और अधिक राजनीतिक रंग दे सकते हैं।
फिलहाल भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला बिहार की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। जांच की दिशा और नेताओं के लगातार आ रहे बयानों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीतिक बहस को और गर्मा सकता है।