नई दिल्ली, 20 जून् 2026 । निवेशकों और उनके परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। अब मृतक निवेशकों के शेयर, बॉन्ड्स और अन्य प्रतिभूतियों को उनके कानूनी वारिसों के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को और सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य परिवारों को अनावश्यक कानूनी और प्रशासनिक जटिलताओं से बचाना है।
सेबी ने उन दावेदारों के लिए एक नई कैटेगरी बनाई है जहां फिजिकल फॉर्म में सिक्योरिटीज की वैल्यू प्रति शेयर 10,000 रुपए से ज्यादा नहीं है। वहीं डीमैट फॉर्म में रखी सिक्योरिटीज के लिए यह लिमिट प्रति शेयर 30,000 रुपए तय की गई है।
स्मॉल-वैल्यू क्लेम की रकम को दोगुना किया
रेगुलेटरी अथॉरिटी ने स्मॉल-वैल्यू क्लेम के अमाउंट को दोगुना कर दिया है। अब फिजिकल शेयर्स के लिए यह सीमा बढ़कर 10 लाख रुपए प्रति शेयर और डीमैट शेयर्स के लिए 30 लाख रुपए प्रति शेयर हो गई है।
इसके अलावा बोर्ड ने कई ऐसे उपायों को मंजूरी दी है, जिससे कागजी औपचारिकताएं यानी प्रोसीजरल रिक्वायरमेंट्स कम होंगी और ट्रांसमिशन प्रोसेस आसान होगी।
पैन कार्ड और वसीयत की अनिवार्यता खत्म
सेबी ने साफ किया है कि चूंकि सिक्योरिटीज का ट्रांसमिशन डीमैट अकाउंट में किया जाएगा, जिसके लिए अकाउंट खोलते समय पैन देना पहले से ही जरूरी होता है। इसलिए अब ट्रांसमिशन के समय अलग से पैन सबमिट करने की जरूरत नहीं होगी।
इसके साथ ही, हाल ही में उत्तराधिकार कानूनों यानी सक्सेशन लॉ में हुए बदलावों को देखते हुए वसीयत का प्रोबेट यानी प्रोबेट ऑफ विल प्राप्त करने की अनिवार्य शर्त को भी खत्म कर दिया गया है।
अलग-अलग कागजात की जगह अब सिर्फ एक NOC
मार्केट रेगुलेटर ने नियमों को सरल बनाते हुए कहा कि अब निवेशकों को अलग-अलग एफिडेविट और एनओसी देने की जरूरत नहीं होगी। इसकी जगह अब एक कंबाइंड एफिडेविट-कम-नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) ही मान्य होगा।
नई व्यवस्था के तहत नामांकन (Nomination) और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे मृतक निवेशकों की वित्तीय संपत्तियों का हस्तांतरण तेजी से हो सकेगा और वारिसों को अपने अधिकार प्राप्त करने में कम समय लगेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लाखों निवेशकों के परिवारों के लिए फायदेमंद साबित होगा। इसके साथ ही निवेशकों को भी समय रहते अपने निवेश खातों में नामांकन अपडेट रखने की सलाह दी जा रही है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी परेशानी न हो।
वित्तीय क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, निवेशकों को अपने डीमैट खाते, शेयर होल्डिंग, बॉन्ड्स, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश साधनों में नामांकित व्यक्ति की जानकारी नियमित रूप से अपडेट करते रहना चाहिए। इससे किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में संपत्ति का हस्तांतरण आसान हो जाएगा।
वारिसों को मिलने वाले संभावित लाभ
- शेयर और बॉन्ड्स ट्रांसफर की प्रक्रिया आसान होगी।
- दस्तावेजी औपचारिकताओं में कमी आएगी।
- निवेश संपत्तियों का निपटारा तेजी से होगा।
- कानूनी विवादों की संभावना कम होगी।
- परिवारों को वित्तीय राहत मिलेगी।