नई दिल्ली, 18 जून् 2026 । राजधानी दिल्ली के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अब और अधिक सख्ती देखने को मिलेगी। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी शैक्षणिक संस्थानों को POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) Act से जुड़े नियमों और दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करना होगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सीधे कार्रवाई की जा सकती है।
स्कूलों और छात्रों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए दिल्ली पुलिस को स्कूल परिसरों और प्रमुख केंद्रों के आसपास पर्याप्त जवानों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर स्कूलों की छुट्टी के समय पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। महिलाओं और बच्चों के साथ छेड़छाड़, उत्पीड़न और यौन अपराधों के मामलों पर जीरो टॉलरेंस नीति दोहराते हुए एलजी ने कहा कि छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा से संबंधित शिकायतों के निस्तारण, जागरूकता कार्यक्रमों, स्टाफ सत्यापन और संवेदनशील मामलों की रिपोर्टिंग को लेकर निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। अधिकारियों का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि स्कूल प्रशासन को शिक्षकों, कर्मचारियों और अन्य स्टाफ को POCSO कानून के प्रावधानों की जानकारी देना अनिवार्य होगा। साथ ही छात्रों को भी उनकी सुरक्षा, अधिकारों और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों से जुड़े मामलों में समय पर रिपोर्टिंग और संवेदनशीलता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी घटना की जानकारी होने के बावजूद उसे छिपाने या रिपोर्ट न करने की कोशिश की जाती है, तो यह कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकता है। इसी वजह से स्कूलों को जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इन कदमों से स्कूलों में बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल तैयार होगा। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।