जालंधर, 17 जून् 2026 । पंजाब में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच जालंधर में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग के एक असिस्टेंट कमिश्नर पर विजिलेंस ब्यूरो का शिकंजा और कस गया है। 10 लाख रुपये रिश्वत मांगने और लेने से जुड़े चर्चित मामले में विजिलेंस ब्यूरो ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिससे मामले की न्यायिक प्रक्रिया ने नया मोड़ ले लिया है।
ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर मांगी गई थी रिश्वत
विजिलेंस जांच के मुताबिक, जालंधर के कारोबारी अनीश गांधी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी फर्म को ब्लैकलिस्ट करने और कार्रवाई करने की धमकी देकर उनसे रिश्वत की मांग की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 24 अप्रैल 2025 को उन्हें CGST कार्यालय बुलाया गया, जहां कार्रवाई से बचाने के बदले 30 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई।
जानकारी के अनुसार, विजिलेंस जांच के दौरान एक कारोबारी से कथित तौर पर 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और उससे जुड़े लेनदेन के संबंध में साक्ष्य जुटाए गए थे। जांच एजेंसी का दावा है कि मामले में पर्याप्त दस्तावेजी और तकनीकी प्रमाण मिले हैं, जिनके आधार पर अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया है।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की सुनवाई करेगी। यदि आरोप तय होते हैं, तो संबंधित अधिकारी को भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों के तहत मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है। मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच जारी बताई जा रही है।
विजिलेंस ब्यूरो का कहना है कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर रिश्वत मांगने या लेने के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और दोषियों को कानून के अनुसार जवाबदेह बनाया जाएगा।
इस घटनाक्रम ने कर प्रशासन और सरकारी विभागों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच और न्यायिक कार्रवाई से व्यवस्था में लोगों का विश्वास मजबूत होता है।
फिलहाल, अदालत में दाखिल चार्जशीट के बाद मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।