छात्र आत्महत्या पर सुप्रीम कोर्ट टास्क फोर्स की गंभीर टिप्पणी: सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य नहीं

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नई दिल्ली, 15 जून्‌ 2026 । vदेश में बढ़ते छात्र आत्महत्या के मामलों को लेकर गठित सुप्रीम कोर्ट की टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, छात्र आत्महत्या को केवल मानसिक स्वास्थ्य की समस्या मानना अधूरा दृष्टिकोण होगा। इसके पीछे सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक और शैक्षणिक कारकों की भी बड़ी भूमिका है। टास्क फोर्स ने कहा कि छात्रों पर बढ़ता प्रतिस्पर्धी दबाव, परीक्षा और करियर की चिंता, सामाजिक अपेक्षाएं तथा संस्थानों का तनावपूर्ण माहौल कई बार उन्हें गंभीर मानसिक संकट की ओर धकेल देता है।

सुप्रीम कोर्ट की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों को “बेहद चिंताजनक” बताया है। अदालत के अनुसार, वर्ष 2022 में देश में 13 हजार से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की थी, जो एक गंभीर सामाजिक चुनौती है।

पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट की अध्यक्षता वाली इस 10 सदस्यीय समिति ने देश के 10 राज्यों के 30 से ज्यादा शिक्षण संस्थानों का दौरा किया है। इनमें IIT दिल्ली, एम्स दिल्ली, जेएनयू और जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसे संस्थान भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने समिति को अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 31 अक्टूबर तक का समय दिया है।

रिपोर्ट में विशेष रूप से कोचिंग हब, उच्च शिक्षण संस्थानों और पेशेवर पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख किया गया है। टास्क फोर्स के अनुसार, कई छात्र असफलता के डर, लगातार प्रदर्शन करने के दबाव, सामाजिक तुलना और भविष्य की अनिश्चितताओं से जूझते रहते हैं। ऐसे मामलों में केवल काउंसलिंग या मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि शिक्षा प्रणाली और संस्थागत संस्कृति में भी सुधार की आवश्यकता है।

टास्क फोर्स ने सुझाव दिया है कि स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में छात्र-अनुकूल वातावरण विकसित किया जाए, जहां संवाद, भावनात्मक सहयोग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को प्राथमिकता मिले। रिपोर्ट में अभिभावकों, शिक्षकों और संस्थानों की साझा जिम्मेदारी पर भी जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छात्रों की समस्याओं को समय रहते समझा जाए और उन पर संवेदनशीलता के साथ काम किया जाए, तो आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश के कई हिस्सों से छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि समस्या बहुआयामी है और इसके समाधान के लिए सरकार, शिक्षण संस्थानों, परिवारों और समाज को मिलकर काम करना होगा।

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