इंसानियत की मिसाल बने रायबरेली SDM: बुजुर्ग की जमीन का सपना किया पूरा

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रायबरेली , 12 जून्‌ 2026 । उत्तर प्रदेश के रायबरेली से प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवीयता की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां एक उप जिलाधिकारी (SDM) ने आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्ग की मदद के लिए अपनी जेब से स्टांप ड्यूटी भरकर उसकी जमीन के पंजीकरण का रास्ता आसान कर दिया। इस मानवीय पहल के बाद बुजुर्ग भावुक हो गए और उन्होंने कहा, “आप न होते, तो जीते जी यह जमीन नहीं देख पाता।” इस घटना की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है और लोग अधिकारी की सराहना कर रहे हैं।

दबंगों की नजर और सरकारी लेटलतीफी के बीच फंसे कंधई लाल ने जब अपनी आपबीती डीएम सरनीत कौर ब्रोका को सुनाई, तो डीएम साहब का पारा चढ़ गया। प्रकरण की गंभीरता को भांपते हुए डीएम ने तुरंत ऑन-द-स्पॉट एक्शन लिया और एसडीएम सदर गौतम सिंह को तलब कर फाइल पर तत्काल आर-पार की कार्रवाई के निर्देश दे डाले।

स्टाम्प ड्यूटी जमा होते ही डिक्री जारी हुई

स्टाम्प ड्यूटी जमा होते ही तत्काल डिक्री जारी की गई और एसडीएम ने अपने हाथों से उसकी कॉपी बुजुर्ग कंधई लाल को सौंपी। सिर्फ कागजी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जमीन पर असली हक दिलाने के लिए भी प्रशासन ने पूरी फील्डिंग सजा दी है। डीएम के निर्देश पर एसडीएम ने तुरंत तहसीलदार को फोर्स के साथ मौके पर जाकर ‘इजराय’ (आदेश का पालन और कब्जा दिलाने) की कार्रवाई सुनिश्चित करने का अल्टीमेटम दे दिया है।

इस घटना ने प्रशासनिक सेवा के उस मानवीय पक्ष को उजागर किया है, जिसकी अक्सर समाज में अपेक्षा की जाती है। आमतौर पर सरकारी अधिकारियों की पहचान नियमों और प्रक्रियाओं के पालन से होती है, लेकिन जब कोई अधिकारी संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करता है, तो उसका प्रभाव समाज पर सकारात्मक रूप से पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पहल ने प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत किया है। सोशल मीडिया पर भी SDM के इस कदम की सराहना की जा रही है। यह घटना इस बात का उदाहरण बन गई है कि प्रशासनिक पद केवल अधिकार का नहीं, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता का भी माध्यम हो सकता है।

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