भारतीय निशानेबाजी को बड़ा झटका: दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन

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नई दिल्ली, भारतीय खेल जगत के लिए बेहद दुखद खबर सामने आई है। देश के दिग्गज निशानेबाज, एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता और प्रसिद्ध कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि म्यूनिख से भारत लौटने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

जसपाल राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 9 बार गोल्ड मेडल जीते थे। इनमें लगातार 4 एडिशन के गोल्ड शामिल रहे। राणा पेरिस ओलिंपिक में डबल ओलिंपिक मेडल जीतने वाली शूटर मनु भाकर के कोच भी थे। उन्हें फरवरी 2025 में 25 मीटर पिस्टल के लिए भारतीय जूनियर टीम का हाई परफार्मेंस कोच बनाया गया था।

जसपाल राणा ने कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स को मिलाकर कुल 23 मेडल अपने नाम किए थे। इनमें एशियन गेम्स में 4 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मिलाकर कुल 8 मेडल थे। कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने 9 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज को मिलाकर कुल 15 मेडल जीते थे। उन्हें 18 साल की उम्र में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में दर्द से कराहते हुए गोल्ड जीता था

जसपाल राणा ने कई इंटरनेशनल इवेंट्स में मेडल जीते, लेकिन 1994 में मिलान वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में उनकी जीत यादगार रही। प्रतियोगिता से एक दिन पहले उनके घुटने में फोड़ा हो गया था। डॉक्टरों ने उन्हें सर्जरी की सलाह दी और अस्पताल से छुट्टी देने से इनकार कर दिया था।

डॉक्टरों की सलाह के उलट जसपाल और उनके कोच सनी थॉमस ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का फैसला किया, लेकिन अस्पताल से निकलने के बाद उसी रात फोड़ा फूट गया, जिससे उनका दर्द बढ़ गया। वे अपनी जींस तक नहीं उतार पा रहे थे। ऐसे में उन्होंने जींस को फाड़कर हाफ पैंट बनाई और उसे पहनकर ही अगली सुबह प्रतियोगिता में उतरे।

राणा ने असहनीय दर्द के साथ कराहते हुए मैच खेला और जूनियर कैटगरी में वर्ल्ड रिकॉर्ड स्कोर के साथ अपना पहला इंटरनेशनल गोल्ड मेडल जीता। इसी साल उन्होंने हिरोशिमा एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता।

जसपाल राणा का जाना केवल एक खिलाड़ी का निधन नहीं, बल्कि भारतीय निशानेबाजी की एक ऐसी विरासत का अंत है जिसने देश को अनेक अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां दिलाईं और युवा खिलाड़ियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके योगदान को भारतीय खेल इतिहास हमेशा याद रखेगा।

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