सुपरटेक ईको विलेज-3 में गहराया जल संकट, 14 दिनों से बूंद-बूंद पानी को तरस रहे दो हजार परिवार

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ग्रेटर नोएडा, 09 जून्‌ 2026 ।  ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित सुपरटेक ईको विलेज-3 में जल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। सोसायटी के करीब दो हजार परिवार पिछले 14 दिनों से पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच नियमित जलापूर्ति बाधित होने से निवासियों का दैनिक जीवन प्रभावित हो गया है। पीने के पानी से लेकर घरेलू जरूरतों तक के लिए लोगों को टैंकरों और वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

सोमवार से नहीं आया पीने का पानी

आरोप है कि सोमवार दोपहर 12 बजे से चार टावरों में पीने का पानी आया ही नहीं। लोगों ने मेसेज कर प्रबंध को इसकी शिकायत दी। बताया गया कि ग्रेनो प्राधिकरण की तरफ से पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो रही। इस वजह से अंडरग्राउंड टैंक खाली हो गए है। आरोप है कि पीने के पानी की समस्या को लेकर ग्रेनो प्राधिकरण में शिकायत करने पर पानी का प्रेशर और सप्लाई पूरी होने की बात बताई जाती है।

निवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है। सुबह और शाम के समय पानी की आपूर्ति बेहद कम दबाव में हो रही है, जिससे ऊपरी मंजिलों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। कई परिवारों को महंगे दामों पर निजी टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है।

रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और स्थानीय निवासियों ने संबंधित अधिकारियों तथा प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती आबादी के अनुरूप जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया, जिसके कारण यह संकट उत्पन्न हुआ है। कई निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट की तेजी से विकसित होती हाउसिंग सोसायटियों में जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। भूजल स्तर में गिरावट, बढ़ती आबादी और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। ऐसे में संबंधित एजेंसियों को दीर्घकालिक जल प्रबंधन योजना तैयार करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के संकट से बचा जा सके।

फिलहाल हजारों परिवारों की नजरें प्रशासन और सोसायटी प्रबंधन की ओर टिकी हैं। निवासियों की मांग है कि तत्काल प्रभाव से पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए और समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

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