धर्मांतरण के बाद SC-ST आरक्षण पर हाईकोर्ट सख्त, जनहित याचिका पर सरकार से मांगा जवाब
नैनीताल, 19 मई 2026 । धर्मांतरण के बाद अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC-ST) आरक्षण का लाभ लेने के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित राज्य सरकार और अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले को सामाजिक और संवैधानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि धर्म परिवर्तन करने के बाद भी कुछ लोग SC-ST आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं, जबकि संविधान और संबंधित कानूनों के तहत इस विषय को लेकर स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि ऐसे मामलों की जांच कराई जाए और नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से पूछा है कि इस संबंध में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और ऐसे मामलों की पहचान के लिए क्या व्यवस्था मौजूद है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या धर्मांतरण के बाद आरक्षण लाभ जारी रखने को लेकर कोई स्पष्ट नीति या निगरानी तंत्र लागू है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था से सीधे जुड़ा हुआ है। भारतीय संविधान में अनुसूचित जातियों को मिलने वाले आरक्षण को ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव और उत्पीड़न से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण की पात्रता लंबे समय से बहस का विषय रही है।
इस मामले में अदालत का अंतिम फैसला भविष्य में आरक्षण नीति और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर व्यापक असर डाल सकता है। फिलहाल सभी की नजरें सरकार के जवाब और आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।