खाने की नली में 20 दिन तक फंसा रहा नकली दांत, BHU डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी से बचाई मरीज की जान

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वाराणसी, 16 मई 2026 । काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल में डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल मेडिकल केस को सफलतापूर्वक संभालते हुए मरीज की खाने की नली में फंसा नकली दांत एंडोस्कोपी तकनीक से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बताया जा रहा है कि नकली दांत करीब 20 दिनों तक मरीज की फूड पाइप यानी इसोफेगस में फंसा रहा, जिसके कारण मरीज को खाना निगलने में गंभीर परेशानी हो रही थी और उसका लगभग 10 किलो वजन भी कम हो गया था।

शनिवार को डॉ. तिवारी ने बताया कि गैस्ट्रोलॉजी के डॉक्टर होने के नाते अगर खाने की नली में कोई सामान्य खाद्य पदार्थ फंस जाए तो इंडोस्कोपी से आसानी से निकाला जा सकता है, लेकिन नुकीला दांत निकालना इतना सरल नहीं था। दांत न केवल नली को जख्मी कर रहा था, बल्कि खाना भी ऊपर की ओर फंस रहा था। इससे नली फटने का खतरा भी पैदा हो गया था। काफी मशक्कत के बाद 45 मिनट की प्रक्रिया में इंडोस्कोपी के जरिए दांत को बाहर निकाला गया।

डॉक्टरों के अनुसार मरीज लगातार गले में दर्द, उल्टी, निगलने में तकलीफ और कमजोरी जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। शुरुआत में सामान्य संक्रमण समझकर इलाज कराया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर विस्तृत जांच की गई। एंडोस्कोपी और स्कैनिंग में पता चला कि नकली दांत खाने की नली में फंसा हुआ है और वहां सूजन भी बढ़ चुकी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बनाई गई। ऑपरेशन के बजाय एंडोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए डॉक्टरों ने बेहद सावधानी से नकली दांत को बाहर निकाला। चिकित्सकों ने बताया कि यदि थोड़ी और देरी होती तो मरीज को संक्रमण, अंदरूनी जख्म या जानलेवा जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता था।

डॉक्टरों ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि नकली दांत लगाने वाले बुजुर्गों और मरीजों को भोजन करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि अचानक निगलने में दिक्कत, लगातार दर्द या खाने के बाद उल्टी जैसी समस्या हो तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।

इस सफल प्रक्रिया के बाद मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों ने इसे मेडिकल टीमवर्क और आधुनिक एंडोस्कोपी तकनीक की बड़ी सफलता बताया है।

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