पंजाब में छात्रों की सेहत पर बड़ा फैसला: स्कूल-कॉलेज में एनर्जी ड्रिंक पर रोक

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लुधियाना , 24 अप्रैल 2026 । पंजाब सरकार ने छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के सभी स्कूलों और कॉलेजों में एनर्जी ड्रिंक की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य युवाओं में बढ़ती कैफीन और शुगर की खपत को नियंत्रित करना और उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करना है।

जारी आदेश के अनुसार, अब न सिर्फ बच्चों को एनर्जी ड्रिंक बेचना मना होगा, बल्कि स्कूल-कॉलेज कैंटीन और आसपास भी इसकी बिक्री पर रोक रहेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल से 100 मीटर और शहरी इलाकों में 50 मीटर के दायरे में एनर्जी ड्रिंक नहीं बेची जा सकेगी। स्वास्थ्य विभाग ने अपने आदेश में बताया कि कई एनर्जी ड्रिंक्स के लेबल पर पहले ही लिखा होता है कि ये बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं हैं, बावजूद इसके इन्हें बड़े पैमाने पर बच्चों और युवाओं को बेचा जा रहा है। इन ड्रिंक्स में कैफीन, ग्वाराना, टॉरिन, जिनसेंग जैसे तत्व होते हैं, जो शरीर पर उत्तेजक प्रभाव डालते हैं।

निर्देशों के अनुसार, किसी भी शैक्षणिक संस्थान के कैंपस या आसपास एनर्जी ड्रिंक बेचने पर रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों, कैंटीन संचालकों या संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक एनर्जी ड्रिंक का सेवन युवाओं में अनिद्रा, हृदय गति बढ़ने, चिंता और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि छात्रों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जा सके।

यह पहल Punjab Government की उन नीतियों का हिस्सा है, जिनका लक्ष्य शिक्षा के साथ-साथ छात्रों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। इसके तहत स्कूलों में हेल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलाए जाएंगे, जिससे बच्चों को संतुलित आहार और स्वस्थ आदतों के बारे में जानकारी दी जा सके।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा और समय-समय पर निरीक्षण भी किए जाएंगे। इससे पहले भी कई राज्यों में इस तरह के कदम उठाए गए हैं, लेकिन पंजाब का यह निर्णय व्यापक स्तर पर लागू होने के कारण खास माना जा रहा है।

इस फैसले से जहां छात्रों की सेहत को फायदा मिलने की उम्मीद है, वहीं अभिभावकों और शिक्षकों ने भी इसका स्वागत किया है।

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