नई दिल्ली, 21 अप्रैल 2026 । देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में न केवल आम लोग, बल्कि पढ़े-लिखे और जागरूक नागरिक भी ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहे हैं, जो एक गंभीर सामाजिक और कानूनी चुनौती बन चुकी है।
इसके बाद उन्होंने मामले को 12 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। सीजेआई ने उस बुजुर्ग महिला का जिक्र करते हुए कहा, ”दुर्भाग्य से, उनकी सेवानिवृत्ति की पूरी राशि ठग ली गई।” एक वकील ने पीठ को बताया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा इस मुद्दे पर सुनवाई के बावजूद ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
CJI ने इस बात पर जोर दिया कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। फिशिंग, फर्जी कॉल, OTP फ्रॉड, निवेश के नाम पर ठगी और सोशल मीडिया के जरिए धोखाधड़ी जैसे मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ-साथ साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते दायरे ने जहां सुविधा बढ़ाई है, वहीं जोखिम भी बढ़ा है। ऐसे में आम लोगों को सतर्क रहने और अपनी निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करने की सलाह दी जा रही है। साथ ही, संदिग्ध लिंक, कॉल या मैसेज से दूर रहने की जरूरत है।
CJI ने सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से भी अपील की कि साइबर अपराध से निपटने के लिए मजबूत तंत्र विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के अनुरूप कानून और जांच प्रणाली को भी अपडेट करना होगा, ताकि अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
कुल मिलाकर, यह बयान देश में साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है और यह संकेत देता है कि आने वाले समय में इस दिशा में और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।