आस्था और पारिवारिक विवाद का टकराव—बागेश्वर धाम से लौटी महिला को बेटे ने घर से निकाला

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नालंदा , 18 अप्रैल 2026 । बिहार राज्य महिला आयोग में एक मामला सामने आया है जिसमें एक बूढी मां बाबा बागेश्वर धाम दर्शन के लिए गई थी। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल Bageshwar Dham से लौटने के बाद एक महिला के साथ हुए व्यवहार ने सामाजिक संवेदनाओं को झकझोर दिया है। खबर के अनुसार, महिला जैसे ही घर पहुंची, उसके ही बेटे ने उसे घर से बाहर निकाल दिया। यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और पारिवारिक रिश्तों पर कई सवाल खड़े कर रहा है।

जिस किराए के मकान पर वह अपने बहू और बेटे के साथ रह रही थी, वे लोग उस घर को छोड़कर कहीं चले गए हैं। अब महिला अपने बेटे और बहू को ढूंढ रही है और उनके साथ ही रहना चाहती है। मामला नालंदा के बिहारशरीफ का है और आवेदिका दानापुर के एक वृद्ध आश्रम में रह रही थी।

महिला की शादी 14 साल की उम्र में ही हुई थी। जब वह 19 साल की थी तब उसके पति का देहांत हो गया। उस वक्त एक बेटा गर्भ में था। विधवा होने के बाद आवेदिका अपने मायके में ही रह रही थी।

बिहारशरीफ में आवेदिका के पिता काम करते थे तो बच्चा वहीं पला बढ़ा है। आवेदिका का बेटा आज भी उसे घर का किराया दे रहा है और अपनी मां को वहीं रहने के लिए कहता है लेकिन आवेदिका वहां अकेले नहीं रहना चाहती है।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर चिंता जताई है और इसे पारिवारिक मूल्यों में गिरावट का संकेत माना है। कई लोगों का कहना है कि चाहे किसी भी तरह का विवाद क्यों न हो, इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है, खासकर जब मामला मां-बेटे के रिश्ते का हो।

मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने भी संज्ञान लिया है और दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। जरूरत पड़ने पर महिला को कानूनी सहायता और संरक्षण देने की बात भी कही गई है।

यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि पारिवारिक विवादों को संवाद और समझदारी से सुलझाना जरूरी है। साथ ही, बुजुर्गों और महिलाओं के प्रति सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करना हर परिवार और समाज की जिम्मेदारी है।

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