नोएडा श्रमिक आंदोलन को मिला सियासी समर्थन: “हर मजदूर के साथ खड़ा हूँ” – राहुल गांधी
नई दिल्ली, 14 अप्रैल 2026 । नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन को अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक समर्थन मिलने लगा है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने खुलकर मजदूरों के पक्ष में बयान देते हुए कहा है कि “मैं हर मजदूर के साथ खड़ा हूँ।” उनके इस बयान के बाद आंदोलन को नई राजनीतिक धार मिलती दिख रही है।
उन्होंने इस आंदोलन को देश के मजदूरों की बदहाली और आर्थिक संकट का प्रतिबिंब बताया। गौरतलब है कि सोमवार को यह प्रदर्शन उस समय हिंसक हो गया था जब पुलिस के साथ झड़प के बाद पथराव हुआ और वाहनों में आग लगा दी गई।
इस आंदोलन पर राहुल गांधी ने अपना बयान देते हुए एक्स पर लिखा कि नोएडा में एक मजदूर ₹12,000 कमाता है, जबकि मकान किराया ही ₹4,000 से ₹7,000 के बीच है। सालाना ₹300 की मामूली वेतन वृद्धि के मुकाबले मकान मालिक किराया ₹500 बढ़ा देते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब तक वेतन बढ़ता है, तब तक बेतहाशा महंगाई मजदूर का दम घोंट देती है और उसे कर्ज में डुबो देती है। यही आज के “विकसित भारत” का असली चेहरा है। उन्होंने नवंबर 2025 से लागू होने वाले 4 लेबर कोड की आलोचना करते हुए कहा कि बिना मशविरे के काम के घंटों को बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया गया है। 12-12 घंटे काम करने के बाद भी मजदूर को बच्चों की फीस के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। राहुल गांधी ने नोएडा के श्रमिकों की ₹20,000 न्यूनतम मजदूरी की मांग को जायज ठहराते हुए कहा कि यह लालच नहीं, उनका अधिकार है।
Rahul Gandhi ने कहा कि मजदूर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी मांगों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और जल्द समाधान निकाला जाए, ताकि हालात और न बिगड़ें।
नोएडा में पिछले कुछ दिनों से हजारों मजदूर वेतन, काम के घंटे और अन्य सुविधाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान कई जगहों पर स्थिति तनावपूर्ण भी हो गई थी, जिसके बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। अब विपक्ष के इस समर्थन से मुद्दा और बड़ा हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयानों से श्रमिक आंदोलन को मजबूती मिलती है, लेकिन इससे सियासी माहौल भी गरमा जाता है। एक तरफ विपक्ष मजदूरों के मुद्दों को उठा रहा है, वहीं सरकार स्थिति को नियंत्रित करने और समाधान निकालने में जुटी है।
सरकार की ओर से पहले ही श्रमिकों की कुछ मांगों पर सहमति जताई गई है, जिसमें वेतन वृद्धि जैसे कदम शामिल हैं। हालांकि, अभी भी कई मुद्दों पर बातचीत जारी है।
कुल मिलाकर, Rahul Gandhi के समर्थन के बाद नोएडा का यह श्रमिक आंदोलन अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।