ईरान युद्ध का असर: खाने का तेल 7% महंगा, आम आदमी पर बढ़ा बोझ

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नई दिल्ली,  14 अप्रैल 2026 । मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Iran से जुड़े संघर्ष का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर दिखने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाने का तेल करीब 7% तक महंगा हो गया है, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

ईरान समेत पूरे पश्चिम एशिया में तनाव से जो हालात पैदा हुए हैं, उसके चलते आम भारतीयों का घरेलू खर्च बढ़ रहा है। रसोई से लेकर कपड़े और घरेलू उपकरणों तक, हर चीज या तो महंगी हो गई है या उनके दाम बढ़ने की आशंका गहरा रही है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने एक साथ कई मोर्चों पर दबाव बनाया है। ईवाई इंडिया का विश्लेषण कहता है कि यह असर अगले दो साल तक बना रह सकता है। खाने के तेल के दाम 7% से ज्यादा बढ़ गए हैं। भारत जरूरत का 57% खाद्य तेल आयात करता है। इनमें पाम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल शामिल है।

इस बीच पैकेजिंग, ढुलाई और कच्चे माल की लागत बढ़ने से साबुन, पेस्ट, बिस्किट जैसे FMCG प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां या तो दाम बढ़ाएंगी या पैकेट छोटे करेंगी। इसे ‘श्रिंकफ्लेशन’ कहा जाता है। पेंट, टेक्सटाइल और पर्सनल केयर कंपनियां भी लागत बढ़ने का हवाला देकर कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस महंगाई की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम तेल मार्गों पर तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत पर पड़ता है, और यही बढ़ी हुई लागत खाद्य पदार्थों—खासकर खाने के तेल—की कीमतों में दिख रही है।

भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करते हैं, इस स्थिति से ज्यादा प्रभावित होते हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो उसका असर खाद्य वस्तुओं, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की चीजों पर भी पड़ता है।

एशियाई विकास बैंक (ADB) ने भी चेतावनी दी है कि यदि यह तनाव लंबा चलता है, तो महंगाई और बढ़ सकती है और भारत सहित पूरे एशिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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