नई दिल्ली, 10 अप्रैल 2026 । दिल्ली की प्रमुख शैक्षणिक संस्था University of Delhi में महिला आरक्षण के समर्थन में चल रहे छात्राओं के हस्ताक्षर अभियान को उस समय बड़ी मजबूती मिली, जब दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने खुलकर इसका समर्थन किया। इस पहल ने न केवल विश्वविद्यालय परिसर में बल्कि पूरे शैक्षणिक और सामाजिक दायरे में महिला अधिकारों पर नई बहस को जन्म दे दिया है।
आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आज नारी शक्ति विकास की सहभागी ही नहीं, विकसित भारत की निर्माणकर्ता और नेतृत्वकर्ता बन रही है। लोकसभा और विधानसभाओं में 33% प्रतिनिधित्व की दिशा में यह कदम देश की बेटियों को नई ताकत देगा। 16 अप्रैल को संसद में इस दिशा में आगे बढ़ते कदम, देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों के सपनों, संघर्षों और आकांक्षाओं को नई दिशा और नया विश्वास देंगे।
छात्राओं द्वारा शुरू किया गया यह हस्ताक्षर अभियान विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग को लेकर चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि छात्र संघ, शैक्षणिक समितियों और निर्णय लेने वाली इकाइयों में महिलाओं की भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है, जिसे आरक्षण के माध्यम से संतुलित किया जाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों में लैंगिक समानता सुनिश्चित करना समय की मांग है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं को समान अवसर देना केवल सामाजिक न्याय का मुद्दा नहीं, बल्कि समग्र विकास का आधार है। उनके समर्थन से इस अभियान को राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर मजबूती मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में महिला आरक्षण लागू होता है, तो यह देश के अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। इससे न केवल छात्र राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि नेतृत्व के नए अवसर भी खुलेंगे।
हालांकि, इस मुद्दे पर कुछ वर्गों में मतभेद भी देखने को मिल रहे हैं। कुछ का तर्क है कि आरक्षण के बजाय योग्यता आधारित चयन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं, समर्थकों का कहना है कि ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करने के लिए आरक्षण एक प्रभावी माध्यम है।
कुल मिलाकर, दिल्ली यूनिवर्सिटी में चल रहा यह हस्ताक्षर अभियान अब एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है, जिसे मुख्यमंत्री के समर्थन ने और अधिक प्रभावशाली बना दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या यह देशभर में महिला सशक्तिकरण के लिए नई राह खोलती है।