जुलाना में किसान–आढ़ती आमने-सामने: नए नियमों के विरोध में हड़ताल तेज, बड़े आंदोलन के संकेत

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जुलाना ,  04 अप्रैल 2026 । जुलाना में नए कृषि नियमों के विरोध में किसान नेताओं और आढ़तियों (कमीशन एजेंट्स) का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही, जिससे मंडियों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ और किसानों की फसल की खरीद-बिक्री पर असर पड़ा।

मंडी में कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा और आढ़तियों के साथ-साथ किसानों ने भी धरने में भाग लेकर अपना रोष प्रकट किया। धरने की अध्यक्षता आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान पवन लाठर ने की। धरने के दौरान किसान नेता और ढांडा खाप के पूर्व प्रधान नरेश ढांडा ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि यदि दो दिनों के भीतर बायोमेट्रिक नियम वापस नहीं लिया गया तो वह अपना अंगूठा काटकर मुख्यमंत्री को भेजेंगे।

किसान नेताओं ने साफ कहा है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका आरोप है कि नए नियमों से मंडी व्यवस्था कमजोर होगी और किसानों को उचित दाम मिलने में दिक्कतें आएंगी।

आढ़तियों ने भी इस आंदोलन का समर्थन करते हुए अपनी दुकानों को बंद रखा है। उनका कहना है कि नए प्रावधान उनके व्यवसाय पर सीधा असर डालेंगे और पारंपरिक मंडी सिस्टम को नुकसान पहुंचाएंगे।

Julana की अनाज मंडी में हड़ताल के चलते सन्नाटा पसरा हुआ है। ट्रकों की आवाजाही कम हो गई है और किसानों को अपनी फसल लेकर इंतजार करना पड़ रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों पर भी असर देखने को मिल रहा है।

प्रशासन और सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है, लेकिन बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिशें जारी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन बड़े स्तर पर फैल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शन का असर राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए सभी पक्षों के बीच संवाद बेहद जरूरी है।

कुल मिलाकर, Julana में जारी यह हड़ताल आने वाले दिनों में बड़े किसान आंदोलन का रूप ले सकती है, यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया।

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