कोटक महिंद्रा बैंक घोटाला: नकली स्टाम्प के जरिए फर्जीवाड़ा, आरोपियों की पहचान उजागर

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चंडीगढ़ , 28  मार्च 2026 । देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल Kotak Mahindra Bank से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें आरोपियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से नकली स्टाम्प पेपर का इस्तेमाल कर बैंकिंग सिस्टम को चकमा दिया। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद इस फर्जीवाड़े में शामिल कई आरोपियों की पहचान सामने आई है, जिससे पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।

यह खुलासा जांच एजेंसी ने कोर्ट में आरोपी रजत का रिमांड हासिल करने दौरान किया। बता दें कि इस घोटाले में यह दूसरी गिरफ्तारी है जबकि इससे पहले रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार को गिरफ्तार किया गया था जो फिलहाल रिमांड पर है। बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार राघव ने रिमांड दौरान अहम खुलासे किए हैं। इस केस में यू.पी. कनैक्शन भी सामने आया है। ए.सी.बी. के सूत्रों का कहना है कि इस केस में नकली स्टाम्प भी यूज हुए हैं, हालांकि उनकी बरामदगी अभी तक नहीं हो पाई है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने जाली दस्तावेज तैयार करने के लिए नकली स्टाम्प पेपर का इस्तेमाल किया और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर लोन, गारंटी या अन्य वित्तीय लेन-देन को अंजाम दिया। इस प्रक्रिया में बैंक के नियमों और सत्यापन प्रणाली को दरकिनार किया गया, जिससे बड़ी रकम की हेराफेरी संभव हो सकी।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं बल्कि एक संगठित गिरोह का काम है, जो लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा हो सकता है। आरोपियों ने असली जैसे दिखने वाले स्टाम्प तैयार किए, जिससे बैंक अधिकारियों को भी शुरुआती स्तर पर शक नहीं हुआ।

इस मामले में कुछ बिचौलियों और दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों की भूमिका भी सामने आई है। माना जा रहा है कि इस नेटवर्क में तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी रखने वाले लोग शामिल थे, जिन्होंने सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाया।

बैंक की ओर से भी आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है और संदिग्ध लेन-देन की समीक्षा की जा रही है। साथ ही, भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में आईटी और फॉरेंसिक जांच बेहद अहम होती है, क्योंकि जाली दस्तावेजों की पहचान और डिजिटल ट्रेल के जरिए पूरे नेटवर्क को पकड़ना संभव होता है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें लंबी सजा और भारी जुर्माना शामिल है।

जांच एजैंसी ने बैंक खातों की डिटेल निकाली

एजेंसी ने कोटक महिंद्रा बैंक में मौजूद एम.सी. पंचकूला के 4 खातों के लेनदेन का विवरण एकत्र किया। इनमें खाता संख्या 2015073031 (28 मई, 2020 से 25 मार्च), 2046279112 (8 जून, 2022 से 25 मार्च), 2013457703 (27 अक्तूबर, 2018 से 25 मार्च) और 2046903758 (26 अगस्त, 2022 से 25 मार्च) शामिल हैं। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-विरोधी ब्यूरो के अफसरों की मानें तो जांचकर्ताओं ने 2 व्यक्तियों की पहचान की है जिन्होंने कथित तौर पर 150 करोड़ रुपए की बड़ी रकम प्राप्त की थी। इनमें से एक रजत को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसने खुलासा किया कि उसे 60 करोड़ रुपए से अधिक मिले थे। दूसरा संदिग्ध अभी तक जांच में शामिल नहीं हुआ है। गुरुवार को पंचकूला नगर निगम के वरिष्ठ लेखा अधिकारी से भी एजेंसी ने पूछताछ की।

यह मामला एक बार फिर बैंकिंग सेक्टर में सुरक्षा और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की जरूरत को उजागर करता है, ताकि भविष्य में इस तरह के घोटालों को रोका जा सके।

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