उत्तरकाशी, 26 मार्च 2026 । CHC Naugaon (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव) इन दिनों विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी से जूझ रहा है, जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। यह स्थिति ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करती है, जहां बुनियादी सुविधाओं के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता बड़ी समस्या बनी हुई है।
इस वजह से मामूली इलाज के लिए भी लोगों को डेढ़ सौ किमी दूर देहरादून की दौड़ लगानी पड़ती है। नौगांव सीएचसी में छह एमबीबीएस चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं लेकिन दंत चिकित्सक को छोड़कर चिकित्साधीक्षक, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, ऑर्थोपेडिक्स सहित सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। वहीं, नौगांव अस्पताल की सफाई की जिम्मेदारी सिर्फ एक सफाई कर्मी के भरोसे है जबकि अतिरिक्त सफाई कर्मी को अस्पताल प्रबंधन ने व्यवस्था के तौर पर रखा हुआ है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सीएचसी में सामान्य उपचार तो किसी तरह हो जाता है, लेकिन स्त्री रोग, बाल रोग, हड्डी रोग और मेडिसिन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। इससे न केवल समय और धन की बर्बादी होती है, बल्कि कई मामलों में इलाज में देरी भी हो जाती है, जो गंभीर परिणाम दे सकती है।
स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी के बीच काम करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई बार एक ही डॉक्टर को कई विभागों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उपकरण और दवाइयों की उपलब्धता भी कई बार बाधित रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए सिर्फ भवन और उपकरण पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि योग्य और पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती अनिवार्य है। इसके लिए सरकार को प्रोत्साहन योजनाएं, बेहतर वेतन और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने के लिए सुविधाएं बढ़ानी होंगी।
यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और अधिक प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता की ओर स्पष्ट संकेत देती है।