आजम खान पर गंभीर आरोप: 20 साल पहले मृत महिला को जिंदा दिखाकर करोड़ों की जमीन हड़पने का मामला
बांदा , 23 मार्च 2026 । उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर विवाद गहराता दिख रहा है, जहां समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान पर जमीन कब्जे को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि एक महिला, जिसकी करीब 20 साल पहले मृत्यु हो चुकी थी, उसे दस्तावेजों में “जिंदा” दिखाकर करोड़ों रुपये की जमीन पर कब्जा कर लिया गया।
उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में भू-माफियाओं के सक्रिय होने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि गिरोह रजिस्ट्री कार्यालय में असली मालिक की जगह किसी और को खड़ा कर फर्जी तरीके से जमीन का बैनामा करवा लेता है। ताजा मामले में करीब 20 साल पहले मृत महिला की जगह दूसरी महिला को खड़ा कर जमीन आजम खान के नाम रजिस्ट्री कर दी गई। पीड़ित महेशवरा ने कोतवाली नगर में तहरीर देकर आजम खान समेत 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
पीड़ित का बयान – महेशवरा के अनुसार, उसके पिता बल्दू की लगभग 25 साल पहले मृत्यु हो चुकी थी। इसके बाद उनकी मां फुलिया और महेशवरा के नाम पर ग्राम हटेटीपुरवा की खाता संख्या 192 की जमीन आई। उसकी मां फुलिया की भी 20 साल पहले मृत्यु हो चुकी थी।
मामले के अनुसार, कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर महिला के नाम से संपत्ति के लेन-देन किए गए। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे खेल में राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर, पहचान से जुड़े कागजातों में गड़बड़ी और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। इससे संबंधित जमीन की कीमत करोड़ों में बताई जा रही है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर नियमों की अनदेखी की गई। अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, क्योंकि बिना प्रशासनिक मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर रिकॉर्ड में बदलाव संभव नहीं माना जा रहा।
इस मामले में कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है और संबंधित धाराओं के तहत जांच जारी है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो आजम खान के लिए यह मामला गंभीर कानूनी और राजनीतिक संकट खड़ा कर सकता है।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे “भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग” का उदाहरण बताया है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से उठाया जा रहा है।
कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक जमीन विवाद नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, कानून व्यवस्था और राजनीतिक नैतिकता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर आने वाले समय में और खुलासे होने की संभावना है।