बिहार , 11 मार्च 2026 । बिहार के चुनावी मुकाबले में सिर्फ राजनीतिक रणनीति ही नहीं, बल्कि पार्टियों की आर्थिक ताकत भी अहम भूमिका निभाती है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक चुनावी गतिविधियों में अलग-अलग दलों ने अपनी जमा पूंजी का अलग-अलग हिस्सा खर्च किया। इन आंकड़ों ने यह दिखाया कि किस पार्टी ने चुनाव में अपने संसाधनों का कितना उपयोग किया।
रिपोर्ट के अनुसार Bharatiya Janata Party ने बिहार चुनाव के दौरान अपनी कुल जमा पूंजी का लगभग 2 प्रतिशत खर्च किया। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं और उसने अपने फंड का सीमित हिस्सा ही चुनावी गतिविधियों में लगाया।
दूसरी ओर Indian National Congress ने चुनावी खर्च के लिए अपनी जमा पूंजी का करीब 28 प्रतिशत उपयोग किया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि कांग्रेस ने बिहार में चुनावी मुकाबले को गंभीरता से लेते हुए अपने संसाधनों का बड़ा हिस्सा अभियान पर खर्च किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी खर्च केवल प्रचार तक सीमित नहीं होता। इसमें रैलियां, विज्ञापन, यात्रा, संगठनात्मक गतिविधियां और अन्य चुनावी प्रबंधन से जुड़े कई खर्च शामिल होते हैं। इसलिए अलग-अलग पार्टियों की वित्तीय स्थिति और रणनीति के आधार पर खर्च का प्रतिशत भी अलग हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक बड़ी राष्ट्रीय पार्टियां आमतौर पर कई राज्यों में एक साथ चुनाव लड़ती हैं, इसलिए वे अपने संसाधनों का उपयोग काफी संतुलित तरीके से करती हैं। वहीं कुछ पार्टियां किसी खास राज्य या चुनाव पर ज्यादा फोकस करने के लिए अपने फंड का बड़ा हिस्सा खर्च कर देती हैं।
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में चुनावी फंडिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से राजनीतिक दलों के खर्च से जुड़े आंकड़ों का सार्वजनिक होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।