कछुआ चाल से शुरू हुआ सफर, फिर लंबी छलांग—बिहार में कैसे मजबूत हुआ बीजेपी का जनाधार

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पटना , 11 मार्च 2026 । बिहार की राजनीति में आज Bharatiya Janata Party एक मजबूत ताकत के रूप में स्थापित हो चुकी है, लेकिन यहां तक पहुंचने का उसका सफर काफी लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। शुरुआत में पार्टी की मौजूदगी सीमित थी और वह धीरे-धीरे संगठन मजबूत करते हुए आगे बढ़ी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक बीजेपी ने “कछुआ चाल” से शुरुआत की और समय के साथ रणनीतिक गठबंधन, मजबूत संगठन और बदलते सामाजिक समीकरणों के जरिए बिहार की राजनीति में बड़ी छलांग लगाई।

1990 के दशक में जब बिहार की राजनीति पर Lalu Prasad Yadav और उनकी पार्टी Rashtriya Janata Dal का दबदबा था, उस समय बीजेपी अपेक्षाकृत छोटी राजनीतिक शक्ति मानी जाती थी। उस दौर में पार्टी ने जमीनी स्तर पर संगठन विस्तार पर जोर दिया और कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क तैयार किया।

बिहार की राजनीति में बीजेपी को बड़ा मोड़ तब मिला जब उसने Janata Dal (United) के साथ गठबंधन किया और Nitish Kumar के नेतृत्व में सरकार बनाने का मौका मिला। इस गठबंधन ने राज्य में विकास और सुशासन के मुद्दों को प्रमुखता दी, जिससे बीजेपी को भी राजनीतिक मजबूती मिली।

इसके बाद पार्टी ने अपनी रणनीति में सामाजिक समीकरणों को भी शामिल किया। विभिन्न जातीय और सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने के लिए संगठनात्मक स्तर पर अभियान चलाए गए। पार्टी ने युवाओं, महिलाओं और नए मतदाताओं को जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया, जिससे उसका जनाधार धीरे-धीरे बढ़ता गया।

राष्ट्रीय स्तर पर भी बीजेपी की बढ़ती ताकत का असर बिहार की राजनीति में देखने को मिला। केंद्र में मजबूत नेतृत्व और संगठनात्मक विस्तार के कारण राज्य में पार्टी का प्रभाव लगातार बढ़ता गया। चुनावी रणनीति, बूथ स्तर तक संगठन की सक्रियता और गठबंधन राजनीति ने बीजेपी को बिहार में एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति बना दिया।

आज स्थिति यह है कि बिहार की राजनीति में बीजेपी न केवल सत्ता के समीकरणों का अहम हिस्सा है, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाली प्रमुख पार्टियों में भी शामिल हो चुकी है। पार्टी का यह सफर बताता है कि लंबे समय तक लगातार संगठनात्मक काम और रणनीतिक फैसलों के जरिए राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है।

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