राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव: राजनीतिक समीकरणों की नई परीक्षा

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नई दिल्ली, 18 फ़रवरी 2026 । देश की उच्च सदन राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होंगे। इन सीटों पर कार्यकाल पूरा कर रहे सदस्यों के स्थान पर नए प्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा। चुनाव प्रक्रिया को लेकर विभिन्न राज्यों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम तय करने में जुट गई हैं।

चुनाव आयोग ने बुधवार को 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव कराया जाएगा।

इनमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6 और पश्चिम बंगाल-बिहार की 5-5 सीटें शामिल हैं। शरद पवार, रामदास अठावले, कणिमोझी, तिरुचि शिवा, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का कार्यकाल 2 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।

16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच वोटिंग होगी और उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती की जाएगी।

इन चुनावों का आयोजन भारतीय चुनाव आयोग की देखरेख में होगा। राज्यसभा के सदस्य प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं, बल्कि संबंधित राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायकों द्वारा चुने जाते हैं। इस कारण विधानसभा में पार्टियों की संख्या बल इन चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाती है।

राज्यसभा चुनावों का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि उच्च सदन में संख्या बल केंद्र सरकार के लिए अहम विधेयकों को पारित कराने में महत्वपूर्ण होता है। जिन राज्यों में मुकाबला कड़ा है, वहां क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक गठबंधन की संभावनाएं भी चर्चा में हैं।

16 मार्च को होने वाले मतदान के बाद उसी दिन या निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतगणना की जाएगी। जिन राज्यों में निर्विरोध उम्मीदवार चुने जाएंगे, वहां मतदान की आवश्यकता नहीं होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन 37 सीटों के नतीजे आगामी संसदीय सत्रों में सत्ता और विपक्ष के समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए यह चुनाव केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

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