डिजिटल अरेस्ट मामलों पर सख्त केंद्र सरकार, बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने को हाई-लेवल कमेटी गठित

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नई दिल्ली, 13 जनवरी 2026 । देशभर में सामने आ रहे डिजिटल अरेस्ट मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी उन साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराधों की जांच करेगी, जिनमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और वीडियो कॉल, फर्जी नोटिस व डिजिटल निगरानी के नाम पर पीड़ितों से पैसे ऐंठते हैं। सरकार का यह कदम आम नागरिकों की सुरक्षा और डिजिटल स्पेस में भरोसा कायम रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को डिजिटल अरेस्ट मामले पर सुनवाई होनी है। इससे पहले केंद्र सरकार ने डिजिटल अरेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की और मामले पर डिटेल रिपोर्ट पेश करने के लिए एक महीने का समय मांगा।

केंद्र ने स्टेटस रिपोर्ट में बताया है कि देश भर में डिजिटल अरेस्ट के सभी पहलुओं की जांच करने के लिए गृह मंत्रालय (MHA) ने एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें कई एजेंसियां शामिल हैं।

केंद्र के अनुसार, कमेटी की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) कर रहे हैं। कमेटी में CBI, NIA, दिल्ली पुलिस के IG रैंक के अधिकारी और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के सदस्य सचिव शामिल हैं।

इनके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, विदेश मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय और RBI के संयुक्त सचिव लेवल के अधिकारी भी कमेटी का हिस्सा हैं।

हाई-लेवल कमेटी को इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली समझने, तकनीकी खामियों की पहचान करने और कानूनी व प्रशासनिक उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई है। कमेटी यह भी देखेगी कि मौजूदा कानून और साइबर सुरक्षा ढांचे में कहां सुधार की जरूरत है, ताकि ऐसे अपराधों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके। इसके साथ ही, राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया जाएगा।

सरकार ने साफ किया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान अस्तित्व में नहीं है और किसी भी सरकारी एजेंसी को इस तरह ऑनलाइन गिरफ्तारी का अधिकार नहीं है। इसलिए नागरिकों से अपील की गई है कि वे डर में आकर किसी भी फर्जी कॉल या नोटिस पर विश्वास न करें। विशेषज्ञों का मानना है कि हाई-लेवल कमेटी की सिफारिशें आने के बाद साइबर अपराधों से निपटने की रणनीति और मजबूत होगी और डिजिटल भारत के भरोसे को नया आधार मिलेगा।

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