भारतीय मूल के बिजनेसमैन ने इंटरनेशनल बैंकों से की करोड़ों की धोखाधड़ी: फर्जी दस्तावेज़ और हवाला नेटवर्क का खुलासा

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नई दिल्ली, 1 नवम्बर 2025 । एक चौंकाने वाले अंतरराष्ट्रीय वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें भारतीय मूल के एक बिजनेसमैन पर कई अंतरराष्ट्रीय बैंकों से करोड़ों डॉलर की धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। यह मामला न केवल आर्थिक अपराध की गंभीरता को दिखाता है, बल्कि वैश्विक बैंकिंग सिस्टम में सुरक्षा खामियों पर भी सवाल खड़े करता है।

अमेरिकी कंपनी ब्लैकरॉक की प्राइवेट क्रेडिट यूनिट HPS इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स और फ्रांस की BNP परिबास जैसे ग्लोबल बैंकों के साथ 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,440 करोड़ रुपए का फ्रॉड हुआ है। भारतीय मूल के टेलीकॉम बिजनेसमैन बंकिम ब्रह्मभट्ट पर इन सभी ग्लोबल बैंकों से यह धोखाधड़ी करने का आरोप है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक बंकिम ब्रह्मभट्ट पर फर्जी टेलीकॉम एसेट्स, इनवॉयस, ईमेल और कॉन्ट्रैक्ट बनाकर इन बैंकों से लोन हड़पने का आरोप है। जुलाई 2024 में उनका ये फ्रॉड पकड़ा गया था, जिसके बाद उनकी कंपनियां और खुद ब्रह्मभट्ट दिवालिया हो गए हैं।

फर्जी इनवॉयस-वेबसाइट बनाकर धोखाधड़ी

कोर्ट फाइलिंग्स के मुताबिक, ब्रॉडबैंड टेलीकॉम और ब्रिजवॉयस के फाउंडर और CEO बंकिम ब्रह्मभट्ट ने एसेट-बेस्ड फाइनेंसिंग के जरिए फ्यूचर कस्टमर पेमेंट्स को कोलैटरल दिखाकर लोन लिए। फर्जी इनवॉयस, जाली ईमेल और नकली कॉन्ट्रैक्ट बनाए गए।

यहां तक कि असली टेलीकॉम क्लाइंट्स जैसी फेक वेबसाइट्स भी तैयार की गईं, ताकि ऑडिटर्स और लेंडर्स को धोखा दिया जा सके। पिछले दो साल के हर वेरिफिकेशन ईमेल फेक थे और ये जालसाजी 2018 से चल रही थी। कुल लोन 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा का आंका गया।

कैसे पकड़ा गया फ्रॉड, HPS की ऑडिट से खुलासा

जुलाई 2024 में HPS के एक एम्प्लॉई को कस्टमर ईमेल एड्रेस में गड़बड़ी दिखी। क्रॉस-वेरिफिकेशन पर बेल्जियन टेलीकॉम कंपनी BICS ने कहा कि ब्रिजवॉयस से उनकी कोई डीलिंग नहीं है और ईमेल कन्फर्म्ड फ्रॉड अटेम्प्ट हैं। इसके बाद डेलॉइट और CBIZ की जांच में कस्टमर डेटा, इनवॉयस और कॉन्ट्रैक्ट सब फर्जी साबित हुए।

यह घोटाला एक बार फिर यह साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और निगरानी की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। कई विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि डिजिटल बैंकिंग और ऑफशोर ट्रांजैक्शंस पर सख्त नियामक नियंत्रण अनिवार्य किया जाए।

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