ब्रिटेन में फिल्म इमरजेंसी की स्क्रीनिंग रोकने पर भारत नाराज

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नई दिल्ली,25 जनवरी। ब्रिटेन में कंगना रनोट की फिल्म ‘इमरजेंसी’ की स्क्रीनिंग के दौरान खालिस्तानियों के थिएटर में घुसने और विरोध प्रदर्शन करने पर भारत ने नाराजगी जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को इस पर कहा कि बोलने की आजादी को रोका नहीं जा सकता। इसमें रुकावट डालने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

प्रवक्ता जायसवाल ने कहा- हमने कई रिपोर्ट्स देखी हैं कि किस तरह से फिल्म को बाधित किया जा रहा है। हम लगातार भारत विरोधी तत्वों के हिंसक विरोध और धमकी की घटनाओं के बारे में ब्रिटिश सरकार से चिंता जताते हैं। हमें उम्मीद है कि ब्रिटिश सरकार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एक्शन लेगी।

दरअसल, पिछले रविवार को ब्रिटेन के कुछ थिएटर में फिल्म ‘इमरजेंसी’ की स्क्रीनिंग के दौरान नकाब पहने कुछ खालिस्तानी सिनेमा हॉल में आ गए थे और फिल्म की स्क्रीनिंग रुकवा दी थी। ऐसा कई जगहों पर हुआ जिसके बाद इस फिल्म की स्क्रीनिंग रुकवा दी गई।

ब्रिटिश सांसद ने खालिस्तानियों को गुंडा कहा यह मुद्दा गुरुवार को ब्रिटिश संसद में भी उठा। ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन ने इसे ब्रिटेन के लोगों के अधिकारों का हनन बताया और खालिस्तानियों को गुंडा और आतंकवादी कहा।

ब्लैकमैन ने कहा कि यह एक विवादास्पद फिल्म है और मैं इसके कंटेंट पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। लेकिन मैं अपनी कांस्टीट्यूएंसी (निर्वाचन क्षेत्र) के लोगों और अन्य व्यक्तियों के अधिकारों की बात कर रहा हूं, जिसमें वे फिल्म देखकर अपने विचार बना सकें।

ब्रिटिश सांसद ने कहा कि यह फिल्म उस समय पर आधारित है जब भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं। हालांकि, इसे एक एंटी-सिख फिल्म के रूप में भी देखा जा रहा है। फिर भी, मैं कहना चाहता हूं कि लोगों को यह फिल्म देखने का अधिकार होना चाहिए और उन्हें खुद फैसला करना चाहिए।

पंजाब में भी रोके गए थे शो कंगना रनोट की फिल्म इमरजेंसी बीते शुक्रवार को रिलीज हुई थी। पहले ही दिन पंजाब में सिख संगठन इसके विरोध में उतर आए। अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला और मोहाली में थिएटर्स के बाहर सिख संगठनों के सदस्य काले झंडे लेकर विरोध किया।

SGPC को फिल्म के कुछ सीन पर आपत्ति फिल्म में 1975-77 के दौरान इंदिरा गांधी के पीएम रहते हुए लगाए गए आपातकाल के समय की घटनाओं को दिखाया गया है। खासतौर पर इसमें सिखों के खिलाफ हुई ज्यादतियों, गोल्डन टेंपल पर सेना की कार्रवाई और बाकी घटनाओं को दिखाया गया है। SGPC का दावा है कि फिल्म में इन घटनाओं को गलत रूप में पेश किया है।

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