फिरोजपुर , 26 सितंबर 2026 । पंजाब राज्य के फ़िरोज़पुर ज़िले में अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। संयुक्त कार्रवाई में हथियारों की खेप लेकर डिलीवरी देने पहुंचे पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से विदेशी मॉडल की पिस्टल, मैगजीन, रिवॉल्वर और जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।
यह जानकारी देते हुए सब इंस्पेक्टर सुखविंदर सिंह ने बताया कि उन्हें यह गुप्त सूचना मिली थी कि रविंदर सिंह उर्फ विंदु पुत्र बगीचा सिंह कथित रूप में गैरकानूनी हथियारों और असले की तस्करी करता है जिसके पास इस समय विदेशी पिस्टल है जो शमशान घाट फिरोजपुर कैंट की ओर जाती सड़क पर मिलिट्री डेयरी फार्म के नजदीक एक बेआबाद बिल्डिंग में खड़ा पिस्तौल की डिलीवरी देने के लिए ग्राहक का इंतजार कर रहा है तो इस गुप्त सूचना के आधार पर उनकी पुलिस पार्टी द्वारा तुरंत बताई गई बताई गई जगह पर छापामारी करते हुए नामजद आरोपीय को काबू किया गया जिससे मैगजीन के साथ एक 30 बोर का विदेशी पिस्तौल बिना कारतूस के बरामद हुआ। उन्होंने बताया कि पकड़े गए आरोपी के खिलाफ थाना फिरोजपुर कैंट में आर्म्ड एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करके आगे की कार्रवाई की जा रही है ।
4 विदेशी मॉडल की पिस्टल बरामद
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से चार विदेशी मॉडल की .32 बोर पिस्टल, चार मैगजीन, एक रिवॉल्वर और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए। हथियारों की यह खेप आगे किसी स्थानीय गिरोह या आपराधिक नेटवर्क तक पहुंचाई जानी थी, ऐसी जानकारी जांच में सामने आने की बात कही गई है।
प्रारंभिक पूछताछ में हथियारों की सप्लाई का नेटवर्क मध्य प्रदेश के बड़वानी और हरियाणा के सोनीपत से जुड़ा होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी इन राज्यों से हथियार हासिल करके पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में सप्लाई करते थे।
जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और हथियारों की अंतिम डिलीवरी लेने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं।
पांच आरोपियों से पूछताछ जारी
गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि हथियारों की खेप किससे प्राप्त हुई, इसे गोरखपुर में किसे सौंपा जाना था और इस नेटवर्क में और कितने लोग जुड़े हुए हैं।
पुलिस कथित हथियार तस्करी नेटवर्क की आगे और पीछे की कड़ियों का पता लगाने में जुटी है।
मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। रिपोर्ट के अनुसार, मामले में संगठित अपराध, आपराधिक साजिश और अवैध हथियार रखने/सप्लाई से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
डिलीवरी से पहले कैसे पकड़ा गया गिरोह?
पुलिस की कार्रवाई का आधार पहले से मिली सूचना थी। सूचना के बाद टीम ने संभावित डिलीवरी प्वाइंट पर निगरानी और घेराबंदी की। इसी दौरान संदिग्धों को पकड़ लिया गया और तलाशी में हथियार बरामद होने का दावा किया गया।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बरामद हथियारों का स्रोत क्या था और इस पूरे नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हथियारों की सप्लाई चेन और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।